वाशिंगटन: राजस्थान की राजधानी जयपुर से जुड़ी पारिवारिक जड़ों वाली पिया दांडिया ने अमेरिकी चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की है। डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार दांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराकर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जगह बनाई है। इस जीत के साथ वह अमेरिकी संसद के निचले सदन के लिए निर्वाचित होने वाली दूसरी भारतीय-अमेरिकी महिला बन गई हैं। उनसे पहले प्रमिला जयपाल यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं। चुनावी अनुमानों के मुताबिक, करीब 99 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक दांडिया को लगभग 52 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि असकर करीब 48 प्रतिशत मतों के साथ पीछे थे। एनबीसी न्यूज, सीबीएस न्यूज और डिसीजन डेस्क मुख्यालय के अनुमानों में भी दांडिया को विजेता बताया गया। वर्ष 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के मुकाबले इस क्षेत्र में डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन में करीब 14 प्रतिशत का बदलाव दर्ज किया गया।
जयपुर से अमेरिका पहुंचे माता-पिता, भारतीय परंपराओं में हुआ पालन-पोषण
पिया दांडिया का जन्म और पालन-पोषण फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में हुआ। उनका बचपन जुपिटर में बीता। उनके माता-पिता 1980 के दशक में राजस्थान के जयपुर से अमेरिका पहुंचे थे और वहीं बस गए। उनके पिता डॉ. रोहित दांडिया ने अमेरिका में भी डॉक्टर के रूप में अपनी सेवाएं जारी रखीं, जबकि उनकी मां ने 40 वर्ष की उम्र में जुपिटर में एक मोंटेसरी स्कूल की स्थापना की। स्कूल शुरू करने के पीछे पिया की शिक्षा को बेहतर बनाने का उद्देश्य भी शामिल था।
दांडिया का पालन-पोषण भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं से जुड़े माहौल में हुआ। उनके माता-पिता बचपन से ही उन्हें भारत भेजते थे, ताकि वह अपने चचेरे और ममेरे भाई-बहनों के साथ समय बिता सकें और अपनी पारिवारिक जड़ों को करीब से समझ सकें। अगस्त 2025 में एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने बताया था कि अकेले भारत की यात्राओं ने उनकी पहचान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन अनुभवों से उन्हें अलग-अलग लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और समाज में मौजूद असमानताओं को समझने का अवसर मिला।
दिल्ली की झुग्गियों में बच्चों को पढ़ाया, सामाजिक असमानता को करीब से समझा
हार्वर्ड विश्वविद्यालय में प्रथम वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद पिया दांडिया ने गर्मी की छुट्टियां दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने में बिताईं। वह आशा कोऑपरेटिव सोसायटी से जुड़ीं और सात से 17 वर्ष तक के बच्चों को पढ़ाया। इस दौरान उन्होंने वंचित समुदायों के बच्चों की चुनौतियों को करीब से देखा।
दांडिया के मुताबिक, इस अनुभव ने उन्हें समझाया कि लोगों के बीच अंतर अक्सर उनकी क्षमताओं से ज्यादा उन परिस्थितियों का होता है, जिनमें उन्हें जीवन बिताना पड़ता है। वर्ष 2025 में इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट फंड से समर्थन मिलने के दौरान भी उन्होंने अपने माता-पिता के अमेरिकी सपने का जिक्र किया था। उनका कहना था कि उन्होंने अपना करियर इस उद्देश्य से समर्पित किया है कि ज्यादा से ज्यादा परिवारों को बेहतर अवसर मिल सकें।
हार्वर्ड से पढ़ाई, बोस्टन में अध्यापन और 28 साल की उम्र में बनीं प्रिंसिपल
पिया दांडिया ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से गवर्नमेंट विषय की पढ़ाई की और बोस्टन विश्वविद्यालय से शिक्षा में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने बोस्टन में ‘टीच फॉर अमेरिका’ कार्यक्रम के तहत अध्यापन किया। महज 28 वर्ष की उम्र में वह न्यूयॉर्क के हार्लेम स्थित डेमोक्रेसी प्रेप एंड्योरेंस हाई स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल बन गईं।
उनके चुनाव अभियान के अनुसार, स्कूल के करीब 86 प्रतिशत विद्यार्थी कम आय वाले परिवारों से आते थे। इसके बावजूद स्कूल के सभी स्नातक विद्यार्थियों को कॉलेज में प्रवेश मिला। दांडिया ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा था कि उनका उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य का भरोसा देना और उन्हें उच्च शिक्षा तक पहुंचने में मदद करना था।
व्हाइट हाउस में भी किया काम, एप्पल में संभाली सार्वजनिक क्षेत्र की पहल
वर्ष 2020 में पिया दांडिया को व्हाइट हाउस फेलो के रूप में चुना गया था। इस दौरान उन्होंने व्हाइट हाउस की घरेलू नीति परिषद और अमेरिकी शिक्षा विभाग में काम किया। इसके बाद उन्होंने एप्पल में सार्वजनिक क्षेत्र से संबंधित पहलों का नेतृत्व किया। इलिनॉय के गवर्नर जेबी प्रित्जकर ने भी उन्हें राज्य की पी-20 परिषद में नियुक्त किया था।
शिक्षा, प्रशासन और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में काम करने के बाद दांडिया ने चुनावी राजनीति में कदम रखा। फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से मिली जीत उनका पहला चुनावी विजय अभियान है।
पहले दूसरी सीट से लड़ने की तैयारी, परिसीमन के बाद बदला चुनाव क्षेत्र
पिया दांडिया ने शुरुआत में फ्लोरिडा के 21वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया था। इस सीट पर उनका मुकाबला रिपब्लिकन सांसद ब्रायन मास्ट से होना था। हालांकि, फ्लोरिडा में मध्यावधि परिसीमन के बाद उन्होंने 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ने का फैसला किया। 18 अगस्त को उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी का प्राइमरी चुनाव भी जीत लिया।
फ्लोरिडा पॉलिटिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता पंजीकरण के आधार पर यह क्षेत्र रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में माना जाता है। यहां करीब 1.85 लाख रिपब्लिकन, 1.46 लाख डेमोक्रेटिक और 1.50 लाख ऐसे मतदाता थे, जिन्होंने किसी अन्य राजनीतिक संबद्धता के तहत पंजीकरण कराया था। ऐसे क्षेत्र में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार के रूप में दांडिया की जीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महंगाई, स्वास्थ्य और शिक्षा बने चुनाव प्रचार के प्रमुख मुद्दे
अपने चुनाव अभियान में पिया दांडिया ने महंगाई, भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बंदूक सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी। उन्होंने दक्षिण फ्लोरिडा के लोगों की बढ़ती जीवनयापन लागत और वाशिंगटन की राजनीति को लेकर नाराजगी का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि क्षेत्र के लोग बढ़ते खर्च और दिखावटी राजनीतिक बयानबाजी से परेशान हैं।
चुनाव में दोनों उम्मीदवारों के बीच आर्थिक मुकाबला भी काफी कड़ा रहा। 14 अक्टूबर तक दांडिया के अभियान को करीब 46 लाख डॉलर का चंदा मिला था, जबकि केसी असकर ने लगभग 74 लाख डॉलर जुटाए थे। हालांकि, असकर की जुटाई गई राशि का बड़ा हिस्सा उनके अपने अभियान को दिए गए कर्ज से आया था। संघीय चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने करीब 68 लाख डॉलर स्वयं अपने चुनाव अभियान में लगाए थे।
चुनावी मुकाबले में करोड़ों डॉलर खर्च, कई संगठनों ने किया समर्थन
संघीय चुनाव आयोग के दस्तावेजों के मुताबिक, एमएजीए इंक से वित्त पोषित सुपर पीएसी ‘नो गोइंग बैक पीएसी’ ने 24 अक्टूबर तक पिया दांडिया के खिलाफ करीब 65 लाख डॉलर खर्च किए थे। वहीं, प्रतिनिधि सभा के चुनावों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले ‘हाउस मेजॉरिटी पीएसी’ ने असकर के खिलाफ लगभग 79 लाख डॉलर खर्च किए।
दांडिया को इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट फंड और सर्व अमेरिका पीएसी का समर्थन मिला। वेलिंगटन के रिपब्लिकन मेयर माइकल नेपोलियोन ने भी उनका समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक दल से ज्यादा महत्वपूर्ण उम्मीदवार का व्यक्तित्व होता है और दांडिया ने उनका सम्मान तथा समर्थन हासिल किया है। पूर्व अमेरिकी परिवहन मंत्री पीट बटिगिएग ने 26 अक्टूबर को उनके समर्थन में प्रचार भी किया था।
प्रमिला जयपाल ने दी बधाई, भारतीय-अमेरिकी सांसदों के समूह को मिलेगी मजबूती
पिया दांडिया की जीत के बाद डेमोक्रेटिक कांग्रेसनल कैंपेन कमेटी ने उनके चुनाव अभियान की सराहना की। समिति ने कहा कि उन्होंने दक्षिण फ्लोरिडा के महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया, जिनमें महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और हर व्यक्ति को अमेरिकी सपना पूरा करने का अवसर देना शामिल था।
भारतीय-अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भी दांडिया को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में तीसरी दक्षिण एशियाई-अमेरिकी महिला का स्वागत करने को लेकर वह उत्साहित हैं। दांडिया अपने पति नवनीत अलग और बेटे साहिब के साथ पाम बीच गार्डन्स में रहती हैं। उनकी जीत से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारतीय-अमेरिकी सांसदों के अनौपचारिक समूह ‘समोसा कॉकस’ की मौजूदगी भी बरकरार रहेगी।
