ईरान जंग से टैरिफ तक, 5 फैसले जिनसे घिर गए डोनाल्ड ट्रंप

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

वैश्विक राजनीति में कुछ नेता फैसले लेते हैं, और कुछ नेता फैसलों से सुर्खियाँ बनाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का नाम अक्सर दूसरी श्रेणी में गिना जाता है।

ईरान युद्ध, वेनेजुएला पर कब्ज़ा, व्यापारिक टैरिफ की बौछार और अमेरिकी अदालतों की फटकार… इनसे पता चलता है कि ट्रंप की राजनीतिक शैली रणनीति से ज्यादा जिद लगती है।

नीचे 5 ऐसे फैसले हैं जिन पर दुनिया भर में तीखी बहस छिड़ी।

ईरान युद्ध पर आक्रामक रणनीति

मिडिल ईस्ट में ईरान को लेकर ट्रंप प्रशासन की नीति लगातार टकराव वाली रही। Iran के साथ तनाव को कूटनीति से संभालने के बजाय सैन्य दबाव की रणनीति ने क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाई। यह नीति अमेरिका को लंबे संघर्ष में उलझा सकती है।

मादुरो विवाद और ‘किडनैपिंग’

वेनेजुएला के राष्ट्रपति Nicolás Maduro को लेकर ट्रंप के बयान और अमेरिकी कार्रवाई की चर्चा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विवाद का विषय बनी। ये इसे दूसरे देशों की संप्रभुता में दखल था। ऐसे तो दुनिया का कोई देश सेफ नहीं है ट्रम्प जब जिसे चाहे कब्ज़ा कर सकते हैं।

टैरिफ की ‘आर्थिक बमबारी’

ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी का सबसे चर्चित हिस्सा रहा टैरिफ वॉर। अमेरिका ने कई देशों पर आयात शुल्क बढ़ाए, जिससे वैश्विक व्यापार में अस्थिरता आई। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार इससे कुछ घरेलू उद्योगों को फायदा हुआ, लेकिन कई सेक्टर में लागत और महंगाई भी बढ़ी।

अदालतों से टकराव

ट्रंप प्रशासन के कई फैसलों को अमेरिकी अदालतों में चुनौती मिली। कभी इमिग्रेशन नीति पर, तो कभी प्रशासनिक आदेशों पर अदालतों ने सरकार को कड़ी टिप्पणियां सुनाईं।
इससे यह बहस भी तेज हुई कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच टकराव अमेरिकी लोकतंत्र में नई दिशा ले रहा है।

बयानबाजी जिसने आलोचकों को मौका दिया

ट्रंप की राजनीति का सबसे चर्चित पहलू उनका सीधा और आक्रामक बयान देने का अंदाज है। समर्थक इसे “स्पष्ट नेतृत्व” कहते हैं, जबकि आलोचक इसे कई बार जल्दबाजी या अनावश्यक टकराव की रणनीति बताते हैं।

यही कारण है कि ट्रंप के हर बड़े फैसले के साथ वैश्विक राजनीति में बहस का तूफान खड़ा हो जाता है।

दुनिया की सबसे बड़ी ताकत का नेतृत्व करने वाला नेता जब जोखिम भरे फैसले लेता है, तो उसके असर भी वैश्विक होते हैं। Donald Trump के समर्थक उन्हें मजबूत नेता मानते हैं, जबकि आलोचक उनकी नीतियों को अस्थिर मानते हैं। सच शायद इन दोनों के बीच कहीं है… लेकिन इतना तय है कि ट्रंप की राजनीति ने अंतरराष्ट्रीय मंच को शांत कमरे से ज्यादा बहस के अखाड़े में बदल दिया है।

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