आसमान में ट्रैफिक बढ़ा, लेकिन रेगुलेटर आधे स्टाफ पर!

अजमल शाह
अजमल शाह

लोकसभा में उठे एक सवाल ने भारत के एविएशन रेगुलेटरी सिस्टम की स्थिति पर बहस छेड़ दी है। सांसद Kamakhya Prasad Tasa के प्रश्न के जवाब में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री Murlidhar Mohol ने स्वीकार किया कि प्रमुख नियामक संस्था Directorate General of Civil Aviation (DGCA) में 1630 स्वीकृत पदों में से 787 पद खाली हैं।

यानी लगभग आधी ताकत के साथ देश का एविएशन रेगुलेटर काम कर रहा है।

DGCA: Expansion vs Vacancy

मंत्रालय का कहना है कि 2022–2024 के बीच भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखते हुए 441 नए पद सृजित किए गए। 426 तकनीकी, 15 गैर-तकनीकी। पिछले चार महीनों में 15 अधिकारी और 9 फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर नियुक्त किए गए हैं। 164 तकनीकी अधिकारियों का चयन भी हुआ है।

लेकिन सवाल वही है, क्या बढ़ते एयर ट्रैफिक के बीच इतनी रिक्तियां सुरक्षा निगरानी को प्रभावित कर सकती हैं?

BCAS में भी खाली पद

विमानन सुरक्षा से जुड़ी संस्था Bureau of Civil Aviation Security (BCAS) में 598 स्वीकृत पदों में से 230 पद खाली हैं। सरकार ने 2024 में 84 अतिरिक्त पद सृजित करने की बात कही है, लेकिन ग्राउंड रियलिटी में अभी भी बड़ी कमी दिख रही है।

Aviation Boom vs Regulatory Pressure

भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट्स में से एक है। नई एयरलाइंस, नए एयरपोर्ट, बढ़ती पैसेंजर संख्या…ऐसे समय में नियामक संस्थाओं में भारी रिक्तियां स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करती हैं। हाल के महीनों में विमान दुर्घटनाओं और सुरक्षा चिंताओं ने भी इस मुद्दे को संवेदनशील बना दिया है।

सरकार का दावा

सरकार का कहना है, कामकाज प्रभावित नहीं हुआ। संविदा नियुक्तियों से गैप भरा जा रहा है। इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स के अनुसार ट्रेनिंग दी जा रही है। भर्ती प्रक्रिया तेज की गई है।

उड़ानें रोज बढ़ रही हैं…रनवे लंबा हो रहा है…बस सवाल ये है क्या रेगुलेटरी टीम भी उतनी ही तेजी से टेक-ऑफ कर रही है?

यह मुद्दा सिर्फ स्टाफ की कमी का नहीं है, बल्कि aviation governance के sustainable मॉडल का है। जब सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा हो, तो oversight mechanism की मजबूती और भी जरूरी हो जाती है।

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