“डॉक्टर साहब ने इलाज नहीं, ब्लास्ट प्लानिंग लिख दी प्रिस्क्रिप्शन में!”

अजमल शाह
अजमल शाह

दिल्ली के लाल किला के पास हुए कार ब्लास्ट मामले में अब जांच एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुकी है—इतना दिलचस्प कि बॉलीवुड भी स्क्रिप्ट नोट कर ले।
जांच एजेंसियों ने पाया कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद से जुड़े ‘व्हाइट कॉलर आतंकियों’ ने हवाला नेटवर्क के जरिए ऐसा फंडिंग जुगाड़ रचा कि CA भी नोट्स बनाने लग जाए।

डॉक्टर–जिनका काम लोगों को बचाना था—पर आरोप ये कि वो ब्लास्ट के लिए अमोनियम नाइट्रेट खरीद रहे थे।
कहावत सच हो गई: “डिग्री हाथ में, मगर दिमाग कहीं और।”

Hawala Network: मेवात से दिल्ली तक का ‘नो-इनवॉइस’ रूट

खुफिया विभाग के सूत्र बताते हैं कि मॉड्यूल की डीलिंग्स किसी कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट की तरह स्ट्रक्चर थीं—बस फर्क ये कि प्रोजेक्ट का आउटपुट धमाका था। मेवात का एक एजेंट दिल्ली का हवाला नेटवर्क और अल-फलाह यूनिवर्सिटी के तीन डॉक्टर सब मिलकर बना रहे थे “मेडिकल-टेरर स्टार्टअप.”

एजेंट ने सबसे पहले डॉक्टर शाहीन से संपर्क किया, फिर मुजम्मिल और आखिर में डॉक्टर उमर। इस रफ़्तार को देखकर लगता है मानो एजेंट “फ्रेंचाइज़ी मॉडल” पर काम कर रहा हो!

20 लाख की हवाला फंडिंग — ‘क्लासरूम से क्राइम रूम’ तक

जांच में डॉक्टरों से जुड़ा लगभग 20 लाख रुपये का सबूत मिला है, जिसकी लाइन सीधी-सीदी जैश-ए-मोहम्मद के एक हैंडलर की ओर जाती है। 3 लाख रुपये fertiliser खरीदने में खर्च बाक़ी—ब्लास्ट सामग्री, कार मॉडिफिकेशन और सेटअप में यहां तक कि डॉक्टर उमर और शाहीन के बीच पैसों को लेकर छोटा-मोटा “कैशफ्लो विवाद” भी हुआ। टेरर प्लानिंग में भी UPI की तरह—“पैसा कहाँ गया?” वाली लड़ाई।

Blast से पहले की तैयारियाँ: अमेज़न से नहीं, हवाला से

एजेंसियों के अनुसार ब्लास्ट में इस्तेमाल हुआ सामान ऐसे खरीदा गया जैसे कोई DIY प्रोजेक्ट बना रहे हों—बस ये प्रोजेक्ट सनसनीखेज था।

  • कार में बम सेट करना
  • ज़रूरी केमिकल्स खरीदना
  • फर्टिलाइज़र और अन्य एक्सेसरीज़ की शॉपिंग

कुल मिलाकर—“टेरर किट” बनाई गई, जिसे देखकर क्राइम थ्रिलर राइटर्स भी शरमा जाएं।

मुजम्मिल बना ‘की लीड’: Puzzle का Missing Piece मिला

डॉक्टर मुजम्मिल से मिली जानकारी ने जांच एजेंसियों को बड़ा धागा पकड़ा दिया है। अब पूरा मॉड्यूल, कनेक्शंस, ट्रांजैक्शंस और अंतर्राष्ट्रीय लिंक—एक-एक कर खुल रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि यह ग्रुप दिल्ली के हवाला नेटवर्क के जरिए लगातार फंडिंग ले रहा था।
मतलब एकदम स्टाइल में—“टेरर के लिए EMI Plan.”

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