कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस में विधानसभा चुनाव के बाद जारी अंदरूनी कलह अब पार्टी के बैंक खातों तक पहुंच गई है। पार्टी के वित्तीय लेन-देन को लेकर छिड़े विवाद के बीच वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने पार्टी के बैंक खाते से मिली आर्थिक मदद के सहारे चुनाव लड़ा, वही अब उस खाते के खिलाफ कार्रवाई और जांच की मांग कर रहे हैं।
कुणाल घोष का यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के कुछ बागी विधायकों की शिकायत के बाद तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों पर निकासी संबंधी रोक लगा दी गई है। इन खातों में करीब 440 करोड़ रुपये जमा बताए जा रहे हैं और धन के स्रोत को लेकर जांच की मांग उठाई गई है।
रिताब्रता बनर्जी और संदीपान साहा पर साधा निशाना
कुणाल घोष ने बागी नेताओं के चुनावी खर्च का हवाला देते हुए कहा कि एक उम्मीदवार ने विधायक बनने के लिए कुल 26 लाख रुपये खर्च किए, जिसमें से 25 लाख रुपये पार्टी के खाते से आरटीजीएस के जरिए भेजे गए थे। उन्होंने दावा किया कि यह जानकारी उम्मीदवार के अपने दस्तावेजों और हस्ताक्षरित रिकॉर्ड में दर्ज है।
उन्होंने कहा कि जिस खाते से चुनाव लड़ने के लिए आर्थिक सहायता ली गई, आज उसी खाते को संदेह के घेरे में खड़ा किया जा रहा है। घोष ने सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी के पैसे, पार्टी के चुनाव चिह्न और ममता बनर्जी के नाम पर वोट मांगने वाले नेता अब उसी व्यवस्था पर कार्रवाई की मांग कैसे कर सकते हैं।
संदीपान साहा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनके चुनावी हलफनामे के मुताबिक कुल 27 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए थे, जिसमें से 25 लाख रुपये पार्टी खाते से प्राप्त हुए थे।
440 करोड़ रुपये वाले खातों पर लगी रोक
बागी विधायकों की शिकायत के बाद तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों को ‘डेबिट फ्रीज’ कर दिया गया है। इसका मतलब है कि इन खातों से फिलहाल धनराशि नहीं निकाली जा सकेगी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, निजी क्षेत्र के बैंक में संचालित इन खातों में लगभग 440 करोड़ रुपये जमा हैं।
बताया जा रहा है कि पार्टी के कुछ विधायकों ने खातों में जमा धन के स्रोत की विस्तृत जांच की मांग करते हुए साइबर अपराध थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
धन के स्रोत पर उठाए गए सवाल
शिकायत में जांच एजेंसियों से यह पता लगाने का आग्रह किया गया है कि खातों में जमा धन वैध स्रोतों से आया है या नहीं। शिकायतकर्ताओं ने सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग और विभिन्न घोटालों से जुड़े संभावित वित्तीय लेन-देन की भी जांच की मांग की है।
ममता बनर्जी समर्थक खेमे का कहना है कि उन्हें पुलिस कार्रवाई की जानकारी मिल चुकी है, हालांकि वे अभी औपचारिक सूचना का इंतजार कर रहे हैं।
कोषाध्यक्ष पद को लेकर भी बढ़ा विवाद
कुणाल घोष ने पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह अब पार्टी के कोषाध्यक्ष नहीं हैं और इसलिए वित्तीय मामलों पर पार्टी की ओर से आधिकारिक टिप्पणी करने का अधिकार नहीं रखते।
उन्होंने बताया कि 5 जून को हुई कार्यकारी समिति की बैठक में सर्वसम्मति से शुभाशीष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। तब से वही पार्टी के वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
हार के बाद बढ़ी अंदरूनी खींचतान
पार्टी सूत्रों के अनुसार, विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद संगठन और वित्तीय नियंत्रण को लेकर अलग-अलग गुटों के बीच टकराव तेज हो गया है। बैंक खातों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन की लड़ाई का नया केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।
