
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सवाल उठाता है कि बिजली गई थी या सिस्टम ही अंधेरे में था?
जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन और BJP के पूर्व जिला अध्यक्ष देवेन्द्र कुमार शर्मा पर ₹72 लाख के गबन का गंभीर आरोप लगा है। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने आखिरकार FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इनवर्टर था, फिर जनरेटर क्यों चला?
शिकायतकर्ता और बैंक के पूर्व डायरेक्टर सुंदर सिंह के अनुसार, बैंक में इनवर्टर पहले से मौजूद था, इसके बावजूद जनरेटर चलाने के नाम पर फर्जी भुगतान दिखाया गया।
आरोप है कि रिश्तेदार को फर्जी जनरेटर ठेकेदार बनाकर नकली बिल तैयार किए गए और करीब ₹72 लाख रुपये बैंक से निकाल लिए गए।
यह सवाल अब तैर रहा है — जब लाइट थी, तो बिल किस बात का था?
विरोध किया तो रास्ता रोका, मीटिंग से निकाला
सुंदर सिंह का दावा है कि उन्होंने बैंक मीटिंग में इस कथित फर्जीवाड़े का विरोध किया था। इसके बाद बैंक अध्यक्ष देवेन्द्र शर्मा ने उन्हें मीटिंग में आने से रोक दिया, नोटिस भिजवाया और कथित तौर पर धमकियाँ भी दीं।
29 नवंबर की सुबह बैंक कर्मचारी के फोन पर मीटिंग में बुलाया गया, लेकिन रास्ते में ही मामला गरमा गया।
गाली, धमकी और SC/ST Act
आरोप है कि बैंक अध्यक्ष और उनके ड्राइवर ने रास्ता रोककर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया, गाली-गलौच की और जान से मारने की धमकी दी।
सुंदर सिंह ने पुलिस में शिकायत की, लेकिन जब FIR दर्ज नहीं हुई तो ACJM द्वितीय कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट के आदेश पर FIR, जांच शुरू
न्यायधीश अविरल सिंह के आदेश पर कोतवाली नगर में देवेन्द्र कुमार शर्मा के खिलाफ BNS और SC/ST Act की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है।
CO प्रखर पांडेय के अनुसार, मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
यह मामला सिर्फ ₹72 लाख का नहीं है, यह सवाल है सहकारी बैंकों की पारदर्शिता, और उस सिस्टम का, जहाँ इनवर्टर होते हुए भी जनरेटर चल जाता है… कागज़ों में।
अब देखना होगा कि जांच सच उजागर करती है या फाइलों में ही बिजली गुल रहती है।
दुश्मन मेहमान! जब पाकिस्तान का नेता था Republic Day Chief Guest
