
बिहार की सियासत फिर से गरमा गई है और इस बार हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बड़ी चुनावी मांग रख दी है। उन्होंने एनडीए से कम से कम 20 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग की है।
मांझी का गणित: मान्यता चाहिए तो 6% वोट ज़रूरी
मांझी ने कहा:
“हम अभी सिर्फ निबंधित पार्टी हैं। अगर हमें मान्यता प्राप्त दल बनना है तो हमें कुल वोट का 6% लाना होगा और कम से कम 7-8 विधायक जीतने चाहिए।”
इसके लिए उन्होंने 20 सीटों पर लड़ने की बात दोहराई ताकि:
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6% वोट शेयर हासिल किया जा सके
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10 से 14 विधायक जीतकर पार्टी की पकड़ मजबूत हो
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अगली बार चुनाव आयोग से “मान्यता प्राप्त दल” का दर्जा मिल सके
“सीएम नहीं चाहिए, सीटें दे दो”
मांझी ने अपने राजनीतिक स्टैंड को बिल्कुल स्पष्ट किया:
“हम मुख्यमंत्री पद की मांग नहीं करते। एनडीए से जो भी नेता सीएम बने हमें फर्क नहीं पड़ता। लेकिन हम भी तभी कुछ काम करवा पाएंगे, जब कम से कम 15-25 सीटों पर चुनाव लड़ें।”
उन्होंने कहा कि जनता की ओर से भी यही मांग है कि उनकी पार्टी को सम्मानजनक हिस्सेदारी मिले।
एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर तनाव?
बिहार में भाजपा-जदयू-हम-पार्टी एनडीए गठबंधन के अहम घटक हैं। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सीट शेयरिंग को लेकर भीतरखाने खींचतान शुरू हो गई है।
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बीजेपी और जेडीयू की हिस्सेदारी लगभग तय मानी जाती है
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छोटे दल, जैसे जीतन राम मांझी की पार्टी, बढ़ी हुई भूमिका चाहते हैं
विपक्ष भी तैयार: RJD-कांग्रेस ने शुरू की रैलियाँ
वहीं दूसरी ओर, राजद और कांग्रेस मिलकर रैलियां और जनसभाएं तेज कर चुके हैं। महागठबंधन अपने वोटबैंक को फिर से संगठित करने में जुटा है।
बिहार की सियासत में “सीट” ही असली ताकत
जीतन राम मांझी की ये मांग सिर्फ राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि पार्टी की संवैधानिक मान्यता की रणनीति भी है। अब देखना होगा कि एनडीए उन्हें कितनी गंभीरता से लेता है, और क्या उन्हें 20 सीटें मिलती हैं या नहीं।

