
बंगाल की सियासत…कभी शतरंज, कभी तूफान। और इस बार चाल ऐसी चली गई कि वोटिंग से पहले ही गठबंधन की नाव बीच धारा में पलट गई। All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen यानी AIMIM ने बड़ा फैसला लेते हुए
हुमायूं कबीर की पार्टी से अपना गठबंधन खत्म कर दिया है।
यह फैसला 23 अप्रैल की वोटिंग से ठीक पहले आया है जिससे बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। चुनाव से पहले दोस्ती टूटी… तो असर वोटिंग तक जाएगा।
विवादित वीडियो बना वजह
सूत्रों के मुताबिक, हुमायूं कबीर के एक कथित वीडियो के वायरल होने के बाद यह दरार गहरी हो गई। Asaduddin Owaisi ने साफ किया कि AIMIM किसी भी ऐसे बयान से दूरी बनाएगी जो मुसलमानों की गरिमा पर सवाल उठाए। सियासत में बयान कभी-कभी बम से ज्यादा धमाका कर देते हैं।
AIMIM का स्पष्ट रुख
AIMIM ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, बंगाल के मुसलमान सबसे गरीब और उपेक्षित समुदायों में हैं। दशकों के शासन के बावजूद हालात में खास सुधार नहीं। पार्टी हाशिए के लोगों को स्वतंत्र राजनीतिक आवाज देना चाहती है। अब AIMIM किसी सहारे नहीं… अपनी राह खुद बनाएगी।
अब अकेले चुनाव लड़ेगी AIMIM
इस पूरे घटनाक्रम के बाद AIMIM ने ऐलान किया है कि वह पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी। फिलहाल किसी अन्य पार्टी से गठबंधन की योजना नहीं। अब मैदान में एक और खिलाड़ी… और मुकाबला और दिलचस्प।
बंगाल की राजनीति में नया ट्विस्ट
West Bengal की राजनीति हमेशा से ही अनपेक्षित मोड़ों के लिए जानी जाती रही है। इस गठबंधन के टूटने से वोट बैंक समीकरण बदल सकते हैं। चुनावी रणनीतियों पर असर पड़ेगा। छोटे दलों की भूमिका अहम हो सकती है। बंगाल में चुनाव सिर्फ वोट नहीं… रणनीति का युद्ध है।
वोटिंग से पहले यह फैसला सिर्फ एक गठबंधन का अंत नहीं… बल्कि एक नई सियासी कहानी की शुरुआत है। अब देखना होगा कि अकेले चलने का यह फैसला AIMIM को ताकत देगा… या सियासत की भीड़ में अलग कर देगा।
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