Awanish Awasthi एक्सटेंशन, विरोधियों का टेंशन एक साल और

सुरेन्द्र दुबे ,राजनैतिक विश्लेषक
सुरेन्द्र दुबे ,राजनैतिक विश्लेषक

लखनऊ की सियासत में एक कहावत फिर ताज़ा हो गई “जो मुख्यमंत्री का भरोसेमंद, वही असली ट्रेंडसेटर।”
पूर्व IAS अधिकारी अवनीश अवस्थी को एक बार फिर एक साल का सेवा-विस्तार मिल गया है। यानी रिटायरमेंट के बाद भी रोल खत्म नहीं, बल्कि और पुख्ता।

CM का भरोसा, एक और साल पक्का

उत्तर प्रदेश सरकार ने आधिकारिक तौर पर हरी झंडी दे दी है। अवस्थी अब एक साल और मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार के रूप में अपनी भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिंगापुर और जापान दौरे से लौटते ही यह फैसला हुआ। कहा जा रहा है कि विदेश यात्रा के दौरान भी अवस्थी साथ रहे यानी global stage पर भी “Trusted Face”।

नियुक्ति विभाग ने आदेश जारी किया, जिसे विशेष सचिव IAS विजय कुमार ने औपचारिक रूप दिया। सरकारी फाइलों में स्याही सूखी भी नहीं होगी कि सियासी गलियारों में चर्चा गर्म हो गई।

भरोसे की राजनीति: अनुभव बनाम एक्सपेरिमेंट

अवस्थी का नाम सिर्फ एक अधिकारी के तौर पर नहीं, बल्कि “Crisis Manager” की छवि के साथ जुड़ा रहा है। कानून-व्यवस्था से लेकर बड़े आयोजनों तक, उनकी प्रशासनिक पकड़ की चर्चा अक्सर होती रही है।

रिटायर्ड IAS होने के बावजूद उनका प्रभाव कम नहीं हुआ बल्कि कहें तो post-retirement innings और मजबूत होती दिख रही है।

राजनीति में जहां कई लोग “वन-टर्म वंडर” साबित होते हैं, वहां अवस्थी का लगातार विस्तार एक अलग ही कहानी बयां करता है।

विरोधियों का सवाल, समर्थकों की मुस्कान

लगातार मिल रहे सेवा-विस्तार पर विपक्षी खेमे में कानाफूसी है। सवाल उठते हैं क्या नई पीढ़ी के अफसरों पर भरोसा कम है? या फिर अनुभव की कोई वैकल्पिक व्यवस्था ही नहीं? “जब सिस्टम स्मूथ चल रहा हो, तो ड्राइवर क्यों बदला जाए?”

सियासत में तंत्र-मंत्र से ज्यादा काम आता है Network + Trust Factor और फिलहाल यह समीकरण अवस्थी के पक्ष में साफ दिखता है।

जमीन से शासन तक पकड़

अवस्थी की पहचान सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रही। शासन और ज़मीन दोनों स्तर पर उनकी सक्रिय मौजूदगी रही है। यही वजह है कि CM के सबसे भरोसेमंद सलाहकार के तौर पर उनकी छवि और मजबूत होती जा रही है।

राजनीति में स्थायित्व दुर्लभ है। लेकिन अवस्थी का कद बताता है Continuity is also a strategy.

सत्ता में ‘Consistency’ ही असली पावर?

सेवा-विस्तार का यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत भी है। योगी सरकार फिलहाल अनुभव और भरोसे की लाइन पर चलती दिख रही है और लखनऊ की गलियों में यही चर्चा है “कुछ तो जादू है… जो हर बार एक्सटेंशन दिला दे!”

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