सब पर भारी, अटल बिहारी! याद करें भारत रत्न अटल को उनकी पुण्यतिथि पर

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

16 अगस्त 2018 को भारत ने अपने सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को खो दिया था। 2025 में उनकी 7वीं पुण्यतिथि पर देश उन्हें नमन कर रहा है। उनकी ओजस्वी वाणी, दूरदृष्टि और “राजनीति में शुचिता” की परिभाषा आज भी राजनीति में एक आदर्श की तरह मानी जाती है।

राजनीति में अटल विचारधारा: लीक से हटकर चलने वाला नेता

  • तीन बार प्रधानमंत्री बनने का गौरव: 1996 (13 दिन), 1998–1999, और फिर 1999–2004 तक।

  • पोखरण परमाणु परीक्षण (1998) – भारत को न्यूक्लियर स्टेट बनाने का ऐतिहासिक फैसला।

  • सर्वोदय के सिद्धांत पर चलने वाला शासन: ग्रामीण सड़कों से लेकर स्वदेशी टेक्नोलॉजी तक।

  • “राजधर्म निभाइए”: गुजरात दंगों पर उनका एक कड़ा संदेश आज भी याद किया जाता है।

कविता में बहती आत्मा, शब्दों में बहता भारत

“हार नहीं मानूंगा, रार नई ठानूंगा, काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं…”

अटल सिर्फ राजनेता नहीं थे, वो हृदय से कवि थे। उनकी कविताएं आज भी युवाओं में जोश और संस्कार दोनों भरती हैं।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बुलंद भारत की आवाज

  • UN में हिंदी में भाषण देने वाले पहले भारतीय नेता।

  • भारत को आर्थिक उदारीकरण और वैश्विक संवाद का हिस्सा बनाने में अटल की भूमिका ऐतिहासिक रही।

अटल की 7वीं पुण्यतिथि पर क्या करें?

  • उनकी कविताओं और भाषणों को सुनें और साझा करें।

  • युवाओं को उनके विचारों से जोड़ें।

  • स्वच्छ राजनीति और सुशासन के लिए प्रेरणा लें।

अटल के कुछ ऐतिहासिक Quotes:

“छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता।”
“हम युद्ध नहीं, शांति चाहते हैं।”
“राजनीति में सिद्धांतों का होना जरूरी है, सिर्फ सत्ता ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए।”

“अटल चले गए, लेकिन उनके विचार आज भी जीवित हैं।”
उनकी पुण्यतिथि पर हर भारतीय को यह प्रण लेना चाहिए कि राजनीति को सेवा का माध्यम बनाएं, सत्ता का साधन नहीं। 

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