
नासिक का चर्चित ‘भोंदू बाबा’ केस अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां सच और भ्रम के बीच की रेखा धुंधली होती नजर आ रही है। एक तरफ गंभीर आरोप—रेप, शोषण, ब्लैकमेलिंग—और दूसरी तरफ कोर्ट में खड़ी 38 महिलाओं की आवाज—“हम अपनी मर्जी से गए थे।” लेकिन सवाल वही—अगर सब कुछ सहमति से था, तो फिर जमानत क्यों नहीं? यही वह टकराव है जिसने इस केस को सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक बहस का केंद्र बना दिया है।
जमानत पर कोर्ट का सख्त रुख
विवादास्पद ज्योतिषी Ashok Kharat को फिलहाल राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए साफ संकेत दिया है कि मामला सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है। आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में है और Nashik की सेंट्रल जेल में बंद है। अदालत ने जांच एजेंसियों को खुली छूट दी है कि वे हर एंगल से मामले की पड़ताल करें।
38 महिलाओं का बयान—‘कोई जबरदस्ती नहीं’
मामले में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब 38 महिलाओं ने कोर्ट में कहा कि वे अपनी इच्छा से बाबा के पास गई थीं। इनमें Rupali Chakankar जैसी चर्चित शख्सियत भी शामिल हैं। उनका दावा—जो कुछ हुआ, वह ‘धार्मिक प्रक्रिया’ का हिस्सा था, कोई दबाव या जबरदस्ती नहीं।
लेकिन यही बयान अब सवालों के घेरे में है—क्या यह सच है या दबाव में दिया गया बयान?
SIT की जांच में चौंकाने वाले खुलासे
जांच कर रही Special Investigation Team (SIT) ने ऐसे सबूत जुटाए हैं, जो मामले को और गंभीर बनाते हैं। पुलिस के मुताबिक:
- 58 आपत्तिजनक वीडियो बरामद
- ₹70 करोड़ की संदिग्ध संपत्ति
- हवाला ट्रांजैक्शन के संकेत
- फर्जी बैंक खातों का नेटवर्क
ये आंकड़े सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।
धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग एंगल
मामला अब सिर्फ यौन शोषण तक सीमित नहीं रहा। Enforcement Directorate (ED) भी जांच में उतर चुकी है। ₹1 करोड़ की ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप इस केस को और भारी बना रहे हैं। सवाल यह है—क्या ‘आस्था’ के नाम पर एक बड़ा फाइनेंशियल रैकेट चल रहा था?

परिवार भी जांच के घेरे में
खरात की पत्नी कल्पना खरात फरार बताई जा रही हैं, जिनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी हो चुका है। बेटे से पूछताछ जारी है। परिवार के हर सदस्य की भूमिका अब जांच के दायरे में है—यानी केस अब ‘व्यक्ति’ से बढ़कर ‘पूरे नेटवर्क’ तक पहुंच चुका है।
राजनीति में भी भूचाल
इस मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। Devendra Fadnavis ने CDR लीक की जांच के आदेश दिए हैं और सख्त कार्रवाई की बात कही है। वहीं, Nationalist Congress Party से जुड़ी रूपाली चाकणकर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया—जो इस केस के राजनीतिक असर को साफ दिखाता है।
दो धाराओं में बंटा समाज
यह केस अब दो हिस्सों में बंट चुका है:
- एक पक्ष: पीड़ित महिलाओं की आवाज—न्याय की मांग
- दूसरा पक्ष: बाबा के समर्थक—‘सहमति’ की दलील
यही टकराव इस केस को और पेचीदा बना रहा है। सवाल सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि सामाजिक सोच और ‘आस्था बनाम शोषण’ की बहस का भी है।
अगर महिलाएं सहमति की बात कर रही हैं, तो फिर इतने सबूत क्यों? अगर सबूत इतने मजबूत हैं, तो बयान क्यों बदल रहे हैं? यही वह सवाल है, जिसका जवाब आने वाले दिनों में Special Investigation Team और कोर्ट तय करेंगे।
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