
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर पवार परिवार की वापसी हो गई है. उपमुख्यमंत्री अजित पवार और उनके चाचा शरद पवार ने करीब दो साल बाद सियासी मंच साझा करने का ऐलान कर दिया है. दोनों गुट अब पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनाव मिलकर लड़ेंगे.
एक चुनावी रैली में अजित पवार ने ऐलान करते हुए कहा, “Pimpri-Chinchwad election में ‘घड़ी’ और ‘तुतारी’ एक हो गए हैं. परिवार फिर साथ आ गया है.”
‘घड़ी’ + ‘तुतारी’: Symbol Politics का बड़ा दांव
‘घड़ी’ – चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त Ajit Pawar गुट की NCP का चुनाव चिन्ह। ‘तुतारी’ – Sharad Pawar गुट का नया चुनाव चिन्ह। दोनों symbols का एक मंच पर आना सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि pure political calculation माना जा रहा है.
क्यों अहम है Pimpri-Chinchwad चुनाव?
Pimpri-Chinchwad नगर निगम:
- BMC के बाद महाराष्ट्र का सबसे अमीर नगर निगम
- NCP (अविभाजित) का पारंपरिक गढ़
- 15 जनवरी को मतदान, 16 जनवरी को नतीजे
यही वजह है कि यह चुनाव सिर्फ नगर निगम नहीं, सियासी सेमीफाइनल माना जा रहा है.
आखिर दोनों साथ क्यों आए? 4 बड़े कारण
गढ़ बचाने की मजबूरी
जब भी पवार परिवार का वोट बैंक बंटा, सीधा फायदा BJP को मिला. 2024 विधानसभा और हालिया निकाय चुनाव इसके गवाह हैं.
BJP के बढ़ते वर्चस्व से चिंता
महायुति में रहते हुए भी Ajit Pawar को लग रहा है कि BJP dominant player बनती जा रही है. गठबंधन में bargaining power बनाए रखने के लिए यह कदम अहम है.
BJP को सियासी मैसेज
यह alliance BJP को साफ संदेश देता है: “हम आपके साथ हैं, लेकिन आप पर निर्भर नहीं.”
Existential Politics
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Sharad Pawar → राजनीतिक विरासत बचाने की लड़ाई

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Ajit Pawar → relevance और mass connect बनाए रखने की कोशिश
नेताओं की प्रतिक्रियाएं: सियासत गरम
Navneet Rana (BJP):
“Ajit Pawar हमेशा Sharad Pawar के निर्देशों पर चलते हैं. यह हमारे लिए नई बात नहीं.”
Zeeshan Siddique (NCP – Ajit):
“परिवार एक हुआ है, पार्टी मजबूत होगी.”
Shiv Sena (Shinde faction):
“Surname politics अब नहीं चलेगी. जनता काम देखती है.”
Shaina NC:
“ये सत्ता के लिए reunion है, जनता नाम से नहीं, performance से वोट देती है.”
महाराष्ट्र की राजनीति में मौसम बदलता है, सरकारें बदलती हैं… लेकिन पवार परिवार की एंट्री हमेशा ‘Full Drama Mode’ में होती है!
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