
गाज़ीपुर में जब सपा सांसद अफजाल अंसारी ने कहा कि “आरएसएस से बेहतर हिंदू धर्म का प्रतिनिधि कोई नहीं”, तो रिपोर्टर भी एक पल को सोच में पड़ गए — “क्या माइक सही से ऑन है?”
उन्होंने न सिर्फ मोहन भागवत के शिवलिंग वाले बयान का समर्थन किया, बल्कि उसे देश की एकता के लिए बेहद ज़रूरी बताया।
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मोहन भागवत ने कहा था, “हर मस्जिद-मजार में शिवलिंग ढूंढना बंद करो, इससे देश कमजोर होगा।”
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तीन दिवसीय आरएसएस शिविर के दौरान भागवत के भाषण ने जहां धर्म के नाम पर राजनीति को ब्रेक लगाने की कोशिश की, वहीं अफजाल अंसारी ने इस लाइन को पकड़ा और कहा:
“भाईचारा वक्त की ज़रूरत है। बाकी सब ‘डिस्ट्रैक्शन’ है।”
उन्होंने अपील की कि अन्य धर्मगुरु भी इस बयान का स्वागत करें, ताकि देश बंटने के बजाय जुड़ने की दिशा में बढ़े।
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मोहन भागवत की तारीफ तो कर दी, लेकिन अफजाल ने मोदी सरकार को नहीं छोड़ा।
“अडानी जैसे लोगों के लिए सरकार मूक हो जाती है, लेकिन आम लोगों के लिए भाषणों में गला सूखता नहीं।”
बिहार को बदलाव की क्रांति का केंद्र बताया और दावा किया कि यूपी चुनाव में INDIA गठबंधन भारी बहुमत से जीतेगा।
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जो राजनीति कल तक आरएसएस को कोसती थी, वही आज कह रही है:
“हम दिल से उनके विचारों की कद्र करते हैं।”
अब जनता सोच रही है:
“आगे क्या? अखिलेश यादव भी ‘शाखा’ में सूर्य नमस्कार करने लगेंगे?”
अफजाल अंसारी का मोहन भागवत की तारीफ करना बताता है कि राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता — न दुश्मनी, न दोस्ती, सिर्फ बयानों की टाइमिंग।
देश को ज़रूरत है एकता की, लेकिन ज़रूरत ये भी है कि हर शिवलिंग खोजने की कोशिश अब ‘Google Maps’ तक सीमित रहे, जमीन पर नहीं।
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