
गुजरात के वडोदरा में पारुल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भाषण तो छात्रों के लिए दिया, मगर संदेश कुछ दूर तक गया — सीधे बॉर्डर पार।
उनका कहना था कि भारत अब वो देश नहीं रहा जिसे डराया या दबाया जा सके, खासकर न्यूक्लियर धमकी से।
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जयशंकर का साफ़ संदेश था —
“भारत कभी भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा।”
ये बयान ऐसे वक्त पर आया है जब क्षेत्रीय तनाव फिर उभर रहा है और सीमा पार से आए बयानों में इशारों में ही धमकी दी जा रही है। लेकिन जयशंकर का अंदाज़ कुछ ऐसा था — “जो उखाड़ना है, उखाड़ लो। भारत झुकने वालों में से नहीं है।”
पहलगाम हमला और ‘टूरिज्म टारगेटिंग’ की साजिश
उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह सिर्फ़ हमला नहीं था, यह भारत की टूरिज्म अर्थव्यवस्था और धार्मिक सौहार्द को चोट पहुंचाने की साज़िश थी।

मतलब साफ़ था — दुश्मन अब बंदूक से ज़्यादा कैमरा और कारोबार पर निशाना साध रहा है।
आतंक पर ज़ीरो टॉलरेंस, टेबल टॉक नहीं
जयशंकर ने दो टूक कहा:
“आतंकवाद पर भारत की ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अब सिर्फ़ काग़ज़ी बात नहीं, वह एक्शन में दिखती है।”
यह बयान उस पुरानी नीति को खारिज करता दिखा, जिसमें “संवाद से समाधान” की बात होती थी। अब तो सीधा “संवाद बाद में, एक्शन पहले” का दौर लगता है।
ये न्यू इंडिया है, भाई!
जयशंकर का पूरा संदेश सिर्फ़ स्टूडेंट्स के लिए नहीं था — ये स्ट्रैटजिक कम्युनिकेशन था उन ताकतों के लिए जो सोचते हैं कि भारत अब भी पुरानी चालों से दब सकता है। अब भारत का विदेश मंत्रालय सिर्फ़ फाइल नहीं घिसता, फील्ड में फॉर्मूलों की जगह फर्स्ट मूव करता है।
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