उन्नाव में स्लॉटर हाउस के पास फैक्ट्री सील, दूषित पानी से फसल खराब होने की शिकायत, दस्तावेज खंगाले जाएंगे…..

उन्नाव दही औद्योगिक क्षेत्र में स्लॉटर हाउस के आसपास संचालित फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी के खेतों में पहुंचने और फसलों को नुकसान होने की शिकायत पर गुरुवार को प्रशासनिक टीम ने जांच की। सिटी मजिस्ट्रेट मनोज सिंह और एसडीएम राजेश विश्वकर्मा ने अधिकारियों के साथ क्षेत्र का निरीक्षण किया। टीम ने दूषित पानी का सैंपल लिया। जांच के दौरान मृत पशुओं के अवशेषों से संबंधित गतिविधियों की जानकारी मिलने पर एक संदिग्ध परिसर को सील कर दिया गया सिटी मजिस्ट्रेट मनोज सिंह दोपहर करीब 2 बजे मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने क्षेत्र में संचालित गतिविधियों और आसपास के खेतों का निरीक्षण किया। दूषित पानी का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा गया है।

सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि पानी की जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रदूषण के लिए जिम्मेदार इकाइयों या लोगों की पहचान की जाएगी। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। निरीक्षण के दौरान चर्बी से घी बनाने की गतिविधि की जानकारी भी सामने आई। इस पर सिटी मजिस्ट्रेट ने संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेकर जांच कराने के निर्देश दिए।

अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान एक ऐसे स्थान की जानकारी मिली, जहां बाहर से मृत पशु लाकर उनके अवशेषों से संबंधित काम किए जाने की बात सामने आई। टीम ने मौके पर पहुंचकर उस परिसर को सील कर दिया। यहां संचालित गतिविधियों की जांच की जाएगी। सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम ने बताया कि क्षेत्र में संचालित गतिविधियों और मौके पर मौजूद लोगों की सूची तैयार कर उनका सत्यापन कराया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि संबंधित लोग और इकाइयां विभागीय रिकॉर्ड में पंजीकृत हैं या नहीं। क्षेत्रीय लोगों ने आरोप लगाया कि कुछ औद्योगिक इकाइयों के जरूरी कंसेंट और एनओसी का कई वर्षों से नवीनीकरण नहीं हुआ है। इस पर अधिकारियों ने जीएम डीआईसी और संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेकर सभी इकाइयों का विवरण जुटाने की बात कही।

जांच में यह पता लगाया जाएगा कि किन इकाइयों के जरूरी दस्तावेज पूरे हैं और किनका नवीनीकरण लंबित है। जिन इकाइयों के दस्तावेज अधूरे पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी खेतों में पहुंच रहा है। इससे करीब 7-8 बीघे में खड़ी फसल खराब हो गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, कुछ फसलें पानी में डूबकर नष्ट हो चुकी हैं, जबकि खेतों में खड़ी दूसरी फसलों पर भी नुकसान का खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों ने मांग की कि औद्योगिक इकाइयों के अपशिष्ट पानी को खेतों में जाने से रोका जाए और उसे उचित नाले या निर्धारित स्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने मृत पशुओं और उनके अवशेषों को खुले में लाकर काटने-पीटने जैसी गतिविधियां होने का आरोप भी लगाया। प्रशासन ने पानी का सैंपल लेकर और संदिग्ध परिसर को सील कर जांच शुरू कर दी है। फसल नुकसान, प्रदूषण और औद्योगिक इकाइयों के दस्तावेजों की जांच के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

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