गगनयान की पहली मानवरहित उड़ान इसी साल, बड़ी अंतरिक्ष सफलता के बाद ISRO ने बताया अगला मिशन; रचा नया इतिहास

नई दिल्ली: भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए ‘ईओएस-05’ उपग्रह को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट तक पहुंचाने में सफलता हासिल की है। जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट ने प्रक्षेपण के करीब 18 मिनट बाद उपग्रह को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित किया। इस सफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अब इसी कैलेंडर वर्ष में पहले मानवरहित गगनयान मिशन के प्रक्षेपण की तैयारी तेज कर दी है।

जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से करीब 5000 किलोमीटर नीचे पहुंचा उपग्रह

इसरो के मुताबिक रॉकेट ने ईओएस-05 को जिस कक्षा में स्थापित किया, वह करीब 31,026 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। यह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट की करीब 36,000 किलोमीटर ऊंचाई से लगभग 5,000 किलोमीटर नीचे है। अब उपग्रह अपनी अंतिम निर्धारित कक्षा तक पहुंचने के लिए खुद आगे की यात्रा करेगा।

इस मिशन के जरिए भारत ने अंतरिक्ष से पृथ्वी पर नजर रखने की अपनी क्षमता को और मजबूत किया है। इस तरह की क्षमता हासिल करने वाले देशों में अमेरिका और चीन के बाद भारत को तीसरा देश बताया गया है।

रॉकेट ने तय लक्ष्य से 2092 किलोमीटर ज्यादा की दूरी तय की

जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट को उपग्रह को जीटीओ में 28,934 किलोमीटर के उच्चतम बिंदु तक पहुंचाना था। हालांकि रॉकेट ने निर्धारित ऊंचाई से 2,092 किलोमीटर ज्यादा की दूरी तय की और उपग्रह को 31,026 किलोमीटर तक पहुंचाया।

जीएसएलवी से भेजा गया अब तक का सबसे भारी पेलोड

इस मिशन में जीएसएलवी-एफ17 ने 2,367 किलोग्राम वजनी ईओएस-05 उपग्रह को निर्धारित कक्षा तक पहुंचाया। यह किसी जीएसएलवी रॉकेट द्वारा उठाया गया अब तक का सबसे भारी पेलोड है। इस सफलता को इस वित्त वर्ष में इसरो की पहली बड़ी सफलता बताया गया है।

इसी साल होगा पहला मानवरहित गगनयान मिशन

इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने शुक्रवार को कहा कि इस कैलेंडर वर्ष में पहले मानवरहित गगनयान मिशन के प्रक्षेपण के लिए व्यवस्थित तरीके से तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि इसरो की टीम उद्योग जगत और अन्य संगठनों के सहयोग से इस मिशन की तैयारियों में जुटी है।

नारायणन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतरिक्ष कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वित्त वर्ष में नौवहन उपग्रह एनवीएस-03 समेत छह और प्रक्षेपणों का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने ईओएस-05 को जासूसी उपग्रह बताए जाने की बात को भी खारिज किया। इस प्रक्षेपण अभियान के निदेशक थॉमस कुरियन और परियोजना निदेशक इम्तियाज अहमद हैं।

दो असफल मिशनों के बाद मिली बड़ी कामयाबी

इसरो को इससे पहले जीएसएलवी-एफ10/ईओएस-03 मिशन में असफलता का सामना करना पड़ा था। 12 अगस्त 2021 को क्रायोजेनिक चरण में तकनीकी खराबी आने के कारण यह अभियान सफल नहीं हो सका था। यह उपग्रह, जिसे पहले जीआईसैट-1 के नाम से जाना जाता था, भारत का पहला जियो-इमेजिंग उपग्रह बनने वाला था।

इसके बाद 12 जनवरी 2026 को पीएसएलवी-सी62/ईओएस-एन1 मिशन भी असफल रहा था। तीसरे चरण के अंत में नियंत्रण प्रणाली में खराबी आने से रॉकेट निर्धारित उड़ान पथ से भटक गया था।

जांच के बाद किए गए बदलाव, फिर मिली सफलता

पिछली असफलताओं के बाद इसरो ने जांच के आधार पर जरूरी बदलाव किए और आगे की तैयारियों को मजबूत किया। करीब आठ महीने बाद ईओएस-05 का सफल प्रक्षेपण न केवल पिछली नाकामियों से उबरने की दिशा में अहम कदम साबित हुआ, बल्कि इसने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की क्षमता को भी नई ऊंचाई दी।

पीएम मोदी ने बताया देश के लिए गर्व का पल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईओएस-05 के सफल प्रक्षेपण की सराहना की। उन्होंने इसे देश के लिए गर्व का पल बताते हुए कहा कि इसरो ने नवाचार और उत्कृष्ट तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसएलवी-एफ17 के सफल प्रक्षेपण से भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की उत्कृष्टता, नवाचार और बढ़ती क्षमताएं सामने आई हैं।

 

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