
बीजिंग: चीन में ह्यूमनॉइड रोबोट तकनीक जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उसकी ताकत हाल ही में बीजिंग में आयोजित दूसरे विश्व ह्यूमनॉइड रोबोट खेलों में साफ दिखाई दी। दुनिया के छह महाद्वीपों के 16 देशों की 666 टीमों के 2,056 रोबोट इस प्रतियोगिता में उतरे। यहां मुकाबला सिर्फ दौड़ने और छलांग लगाने का नहीं था, बल्कि यह भी देखा गया कि रोबोट इंसानों की मदद के बिना वास्तविक जिंदगी के मुश्किल काम कितनी कुशलता से कर सकते हैं।
रोबोट ओलंपिक में बदला प्रतियोगिता का अंदाज
बीजिंग में हुए इस आयोजन को ‘रोबोट ओलंपिक’ के तौर पर भी देखा गया। इस बार प्रतियोगिता का फोकस केवल रोबोट की शारीरिक क्षमता पर नहीं रहा। आयोजकों ने ऐसे कई मुकाबले शामिल किए, जिनका सीधा संबंध रोजमर्रा और औद्योगिक कामकाज से था। यही वजह है कि इस आयोजन ने चीन की बढ़ती रोबोट क्षमता को लेकर दुनिया का ध्यान खींचा।

51 मुकाबले, 21 सीधे असली जिंदगी से जुड़े
इस प्रतियोगिता में कुल 51 खेल विषय रखे गए थे। इनमें 21 को घर, होटल, सामान पहुंचाने, अग्निशमन और अन्य वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया था। रोबोटों को ऐसे काम दिए गए जो भविष्य में इंसानों के लिए सहायक या जोखिम वाले कामों में उपयोग किए जा सकते हैं।
इसमें पाउडर का सही वजन मापने जैसे बारीक काम से लेकर जोखिम भरी परिस्थितियों में आपात स्थिति संभालने तक की क्षमता जांची गई। यानी रोबोट को केवल मैदान पर अच्छा प्रदर्शन नहीं करना था, बल्कि यह साबित करना था कि वह वास्तविक दुनिया में भी उपयोगी साबित हो सकता है।
रिमोट कंट्रोल हटाकर परखी गई रोबोट की ‘सोच’
इस बार 40 प्रतिशत से ज्यादा खेल विषयों में मानव रिमोट कंट्रोल का इस्तेमाल पूरी तरह हटा दिया गया। इसका सीधा मतलब था कि रोबोट को खुद स्थिति समझनी थी, खुद फैसला लेना था और उसी के अनुसार आगे बढ़ना था।
यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि ह्यूमनॉइड रोबोट का भविष्य केवल मशीन को दूर बैठकर नियंत्रित करने में नहीं, बल्कि उसे अपने आसपास के वातावरण को समझकर स्वतंत्र तरीके से काम करने में देखा जा रहा है।

100 मीटर की रफ्तार से अस्पताल तक काम करने की क्षमता
चीनी रोबोटों ने प्रतियोगिता में अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी क्षमता दिखाई। कुछ रोबोट 100 मीटर की दौड़ में इंसानी रिकॉर्ड को चुनौती देते नजर आए। वहीं कुछ रोबोट अस्पताल जैसे वातावरण में सामान पहुंचाने और सटीक रास्ते पर चलने जैसे काम करते दिखाई दिए।
इन क्षमताओं के पीछे रोबोट के जोड़ों को गति देने वाली मोटर, पूरी रोबोट संरचना और नियंत्रण तकनीक में लगातार हो रहा विकास महत्वपूर्ण है।
चीन में 40 हजार से ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट का उत्पादन
चीन की बढ़ती ताकत के आंकड़े भी काफी बड़े हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चीन के स्वदेशी औद्योगिक रोबोट ब्रांड राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के 253 क्षेत्रों तक पहुंच चुके हैं। इस साल की पहली छमाही में ह्यूमनॉइड रोबोट का उत्पादन 40,000 से अधिक इकाइयों तक पहुंच गया।
इन आंकड़ों में चीन की वैश्विक हिस्सेदारी 97 प्रतिशत तक बताई गई है। वहीं इस साल की पहली तिमाही में ह्यूमनॉइड रोबोट के निर्यात में सालाना आधार पर 210 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
नीति से लेकर फैक्ट्री तक, आखिर चीन इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहा?
चीन की इस रफ्तार के पीछे सिर्फ एक वजह नहीं है। सरकारी नीतियों का समर्थन, मजबूत विनिर्माण व्यवस्था, रोबोट उद्योग से जुड़ी पूरी उत्पादन श्रृंखला और बड़े पैमाने पर उपलब्ध वास्तविक उपयोग के अवसर एक साथ काम कर रहे हैं।
चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना में एम्बॉडिड इंटेलिजेंस को भविष्य के प्रमुख उद्योगों के हिस्से के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा देश में रोबोट के अलग-अलग हिस्सों से लेकर अंतिम मशीन तैयार करने तक की व्यापक विनिर्माण क्षमता मौजूद है। इससे नई तकनीक तैयार करने और उसमें तेजी से सुधार करने की लागत और समय दोनों कम हो सकते हैं।
रोबोट ओलंपिक में चमक के साथ दिखीं बड़ी कमियां भी
हालांकि इस पूरी तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। प्रतियोगिता से पहले हुए परीक्षणों के दौरान कई रोबोट तकनीकी गड़बड़ियों का शिकार हुए। इंटरनेट पर वायरल हुए वीडियो में कुछ रोबोट तेज गति से दौड़ते हुए अचानक संतुलन खोकर जमीन पर गिरते नजर आए।
एक वीडियो में तेज रफ्तार से दौड़ता रोबोट सामने मौजूद दीवार से जा टकराया और इसके बाद जमीन पर गिर पड़ा। एक दूसरे वीडियो में रोबोट को दौड़ते समय मोड़ लेना था, लेकिन वह दिशा बदलने के बजाय सीधे दीवार की ओर बढ़ गया। टक्कर के बाद वह गिर पड़ा और पास मौजूद एक व्यक्ति भी बाल-बाल बचा।

गिरने के बाद पैर पटकता दिखा रोबोट
एक अन्य वायरल वीडियो में जमीन पर गिरने के बाद रोबोट बेकाबू होकर अपने पैर चलाता नजर आया। इन घटनाओं ने यह भी दिखाया कि ह्यूमनॉइड रोबोट भले ही तेजी से विकसित हो रहे हों, लेकिन तेज गति में संतुलन बनाए रखना, अचानक दिशा बदलना और अनपेक्षित स्थिति में सही फैसला लेना अभी भी चुनौती है।
फुटबॉल मैदान में भी उतरे ह्यूमनॉइड रोबोट
चीन में रोबोटों के बीच फुटबॉल मुकाबले भी लोगों का ध्यान खींच चुके हैं। ऐसे मुकाबलों में ह्यूमनॉइड रोबोटों को गेंद के पीछे दौड़ते और एक-दूसरे के खिलाफ खेलते देखा गया। यहां तक कि मैदान में चोटिल हुए रोबोट को बाहर ले जाने का दृश्य भी सामने आया।

चीन का लक्ष्य सिर्फ रोबोट बनाना नहीं, उन्हें काम का बनाना है
चीन की रणनीति केवल बड़ी संख्या में रोबोट तैयार करने तक सीमित नहीं दिखाई देती। जोर इस बात पर है कि इन मशीनों को वास्तविक दुनिया में उपयोगी बनाया जाए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी आदान-प्रदान और रोबोट प्रतियोगिताओं के जरिए अनुभव साझा करने के साथ कम लागत वाले खुले स्रोत के बड़े भाषा मॉडल उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
बीजिंग का रोबोट ओलंपिक इसी बदलाव की एक झलक है। यहां एक तरफ रोबोट इंसानी रफ्तार को चुनौती देते नजर आए, तो दूसरी तरफ उनकी तकनीकी खामियों ने बता दिया कि इस क्षेत्र में अभी विकास का लंबा रास्ता बाकी है।
