लखनऊ: एक तरफ केंद्र और राज्य सरकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने का दावा कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (एमवीवीएनएल) के हजारों उपभोक्ता पिछले कई दिनों से ऑनलाइन बिजली बिल जमा न कर पाने की समस्या से जूझ रहे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि न तो विभिन्न भुगतान ऐप से बिल जमा हो पा रहा है और न ही ऑनलाइन माध्यम सुचारु रूप से काम कर रहे हैं। इसके चलते लोगों को बिजली विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
सिकंदरबाग भेजा, वहां से हुसैनगंज का रास्ता दिखाया
उपभोक्ताओं का कहना है कि समस्या केवल ऑनलाइन भुगतान तक सीमित नहीं है। कई मामलों में लोग बिल जमा कराने के लिए एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजे जा रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में उपभोक्ता सिकंदरबाग कार्यालय पहुंचा, जहां उसे बताया गया कि यहां भुगतान नहीं होगा और हुसैनगंज जाकर बिल जमा करना होगा। इस तरह की स्थिति से बुजुर्गों, महिलाओं और नौकरीपेशा लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
डिजिटल भुगतान का दावा, लेकिन सुविधा ठप होने का आरोप
सरकार लगातार कैशलेस और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की बात करती रही है। बिजली विभाग भी ऑनलाइन भुगतान, मोबाइल ऐप और पोर्टल के जरिए सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा करता है। लेकिन यदि उपभोक्ता कई दिनों तक ऑनलाइन भुगतान नहीं कर पाते और अंततः उन्हें कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें, तो डिजिटल व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

क्या उपभोक्ताओं से लेट फीस भी वसूली जाएगी?
उपभोक्ताओं के बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि तकनीकी कारणों से ऑनलाइन भुगतान संभव नहीं हो रहा है और बिल समय पर जमा नहीं हो पा रहा है, तो क्या विलंब शुल्क की जिम्मेदारी भी उपभोक्ताओं पर ही डाली जाएगी? इस संबंध में विभाग की ओर से कोई स्पष्ट सार्वजनिक सूचना सामने नहीं आई है।
पहले भी प्रभावित हो चुकी हैं ऑनलाइन सेवाएं
बिजली विभाग की ऑनलाइन सेवाएं पहले भी तकनीकी कारणों और सिस्टम अपग्रेड के चलते प्रभावित होती रही हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि यह समस्या दोबारा सामने आई है तो इसका स्थायी समाधान किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को बार-बार असुविधा का सामना न करना पड़े।
जरूरत पारदर्शी सूचना और त्वरित समाधान की
यदि तकनीकी खराबी या सर्वर संबंधी कोई समस्या है तो विभाग को इसकी सार्वजनिक जानकारी जारी करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि ऑनलाइन भुगतान सेवा पूरी तरह कब तक सामान्य होगी और जिन उपभोक्ताओं का भुगतान तकनीकी कारणों से नहीं हो पा रहा है, उनके हितों की सुरक्षा कैसे की जाएगी। बिजली जैसी आवश्यक सेवा में भुगतान व्यवस्था का बार-बार प्रभावित होना केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि उपभोक्ता सुविधा और प्रशासनिक जवाबदेही का भी विषय बनता जा रहा है।
