विजयपुर (कर्नाटक): ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार के दौरान कर्नाटक का एक छोटा सा गांव अचानक चर्चा का केंद्र बन गया। विजयपुर (बीजापुर) जिले का अलीपुर गांव, जिसे स्थानीय लोग ‘मिनी ईरान’ के नाम से भी जानते हैं, से करीब 100 लोग खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर इस भारतीय गांव का ईरान के शीर्ष नेता से दशकों पुराना रिश्ता कैसे बना।
1980 के दशक में पड़ी थी इस रिश्ते की नींव
कर्नाटक के विजयपुर जिले का अलीपुर गांव लंबे समय से शिया समुदाय का प्रमुख केंद्र माना जाता है। गांव की अधिकांश आबादी शिया समुदाय से जुड़ी है, जिसके कारण इसे ‘मिनी ईरान’ भी कहा जाता है। खामेनेई और अलीपुर के बीच संबंध 1980 के दशक की शुरुआत में बने, जब उन्होंने भारत यात्रा के दौरान इस गांव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात की, स्थानीय धार्मिक विद्वानों से चर्चा की और गांव की समस्याओं को करीब से समझा। यही यात्रा आगे चलकर अलीपुर और ईरान के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों की मजबूत आधारशिला बनी।
एक दर्दनाक घटना के बाद अस्पताल बनाने का लिया गया फैसला
अलीपुर दौरे के दौरान ग्रामीणों ने खामेनेई को बताया कि समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण एक गर्भवती महिला की रास्ते में ही मौत हो गई थी, क्योंकि आसपास कोई अस्पताल उपलब्ध नहीं था। इस घटना से प्रभावित होकर उन्होंने गांव में अस्पताल बनवाने का आश्वासन दिया। बाद में ईरानी सहायता से यहां इमाम खुमैनी अस्पताल का निर्माण कराया गया, जिसका उद्घाटन भी खामेनेई ने किया। आज भी यह अस्पताल क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है और ग्रामीण इसे उनके साथ जुड़े रिश्ते का सबसे बड़ा प्रतीक मानते हैं।
ग्रामीणों के लिए सिर्फ नेता नहीं, आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी थे खामेनेई
अलीपुर के कई परिवार खामेनेई को केवल ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में नहीं, बल्कि अपने आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में भी देखते थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव के विकास और जनकल्याण के लिए उनके प्रयासों ने लोगों के मन में उनके प्रति गहरा सम्मान पैदा किया। यही वजह रही कि उनके निधन की खबर के बाद गांव में शोक का माहौल देखने को मिला। कई घरों और मस्जिदों पर काले झंडे लगाए गए, लोगों ने सामूहिक रूप से श्रद्धांजलि अर्पित की और कई दिनों तक गांव के बाजार तथा दुकानें भी बंद रहीं।
क्यों कहा जाता है अलीपुर को ‘मिनी ईरान’?
अलीपुर में शिया समुदाय की बड़ी आबादी और ईरान के साथ लंबे समय से बने धार्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों के कारण इस गांव को ‘मिनी ईरान’ के नाम से जाना जाता है। वर्षों से यहां दोनों देशों के बीच सामाजिक और धार्मिक संपर्क बने रहे हैं, जिसने इस गांव को एक अलग पहचान दिलाई है।
