पासपोर्ट पर चुनाव आयोग का बड़ा स्पष्टीकरण! नागरिकता बहस के बीच कहा- वोटर लिस्ट के लिए आज भी मान्य दस्तावेज

नई दिल्ली: भारतीय पासपोर्ट को लेकर देशभर में चल रही नागरिकता संबंधी बहस के बीच चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। आयोग ने गुरुवार को कहा कि वोटर सूची में नाम दर्ज कराने या बनाए रखने के लिए भारतीय पासपोर्ट आज भी पूरी तरह मान्य दस्तावेज है। आयोग के अनुसार, यह उन 12 आवश्यक दस्तावेजों में शामिल है जिनके आधार पर कोई व्यक्ति अपनी पात्रता साबित कर सकता है।

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट पहले भी पहचान और पात्रता के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाता था और वर्तमान में भी इसकी वैधता बरकरार है। आयोग ने कहा कि इस संबंध में किसी प्रकार का नया बदलाव नहीं किया गया है। बिहार और असम में हाल में चलाए गए विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियानों में भी पासपोर्ट को मान्य दस्तावेजों की सूची में शामिल रखा गया था।

पासपोर्ट को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?

पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि कानूनी दृष्टि से पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम और निर्विवाद प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसी बयान के बाद देशभर में नागरिकता और पासपोर्ट को लेकर बहस तेज हो गई।

सामान्य तौर पर भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता का मजबूत प्रमाण माना जाता है। इसी दस्तावेज के आधार पर भारतीय नागरिक विदेश यात्रा करते हैं, अपनी राष्ट्रीयता दर्शाते हैं और विदेशों में भारतीय दूतावासों से सहायता प्राप्त करते हैं। ऐसे में विदेश मंत्रालय के बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए।

कानून क्या कहता है?

पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत सामान्य स्थिति में पासपोर्ट भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है। आवेदन के बाद पहचान, पते और अन्य तथ्यों का सत्यापन किया जाता है। यदि आवेदक भारतीय नागरिक नहीं पाया जाता, तो पासपोर्ट जारी करने से इनकार किया जा सकता है।

हालांकि, कानून की धारा 20 केंद्र सरकार को विशेष परिस्थितियों में किसी गैर-नागरिक को भी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी करने की अनुमति देती है। यही कानूनी प्रावधान इस बहस का केंद्र बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, पासपोर्ट नागरिकता का मजबूत संकेतक जरूर है, लेकिन कानूनी विवाद की स्थिति में इसे अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।

अदालतों का क्या रहा है रुख?

न्यायालयों ने विभिन्न मामलों में पहचान, निवास और नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों के बीच अंतर स्पष्ट किया है। वर्ष 2013 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक मामले में कहा था कि केवल पासपोर्ट होने से भारतीय नागरिकता स्वतः सिद्ध नहीं हो जाती।

अदालतों का मानना रहा है कि पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं, लेकिन नागरिकता का अंतिम निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के आधार पर ही किया जाएगा।

क्या आधार और वोटर कार्ड से नागरिकता साबित होती है?

कानूनी रूप से आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता। आधार अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान है कि आधार संख्या या उसका प्रमाणीकरण किसी व्यक्ति को स्वतः नागरिकता या निवास का अधिकार प्रदान नहीं करता।

इसी तरह वोटर पहचान पत्र भी चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी का दस्तावेज है, लेकिन नागरिकता से जुड़े किसी कानूनी विवाद में अकेले इसे अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।

क्या पासपोर्ट रद्द भी किया जा सकता है?

यदि बाद में यह सामने आता है कि पासपोर्ट गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेजों या गलत नागरिकता दावे के आधार पर हासिल किया गया था, तो सरकार उसे रद्द या जब्त कर सकती है। यही वजह है कि कानून पासपोर्ट को स्थायी और अपरिवर्तनीय नागरिकता प्रमाणपत्र नहीं मानता।

भारत में नागरिकता कैसे तय होती है?

भारत में नागरिकता का निर्धारण संविधान और नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत किया जाता है। कानून के अनुसार नागरिकता जन्म, वंश, पंजीकरण, देशीयकरण और किसी क्षेत्र के भारत में विलय जैसे आधारों पर प्राप्त की जा सकती है।

कानून में समय-समय पर हुए संशोधनों के कारण जन्म के आधार पर नागरिकता की शर्तें भी अलग-अलग अवधियों में बदलती रही हैं। इसी कारण केवल जन्म प्रमाणपत्र को हर मामले में नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

नागरिकता साबित करने के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है?

नागरिकता संबंधी विवाद या जांच की स्थिति में आमतौर पर एक दस्तावेज के बजाय दस्तावेजों की पूरी श्रृंखला देखी जाती है। इनमें जन्म प्रमाणपत्र, माता-पिता की नागरिकता से जुड़े रिकॉर्ड, पुरानी मतदाता सूचियां, स्कूल प्रमाणपत्र, निवास संबंधी दस्तावेज, पारिवारिक अभिलेख, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड और आधार जैसे सहायक दस्तावेज शामिल हो सकते हैं।

वहीं, पंजीकरण या देशीयकरण के माध्यम से भारतीय नागरिकता प्राप्त करने वाले लोगों के लिए सरकार द्वारा जारी नागरिकता प्रमाणपत्र सबसे प्रत्यक्ष और महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है।

 

Related posts