राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड में बड़ा एक्शन! 2 आरोपी गिरफ्तार, टिन्नू यादव फरार; FIR में 8 नामजद, कई धाराओं में केस दर्ज

अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की रकम से कथित चोरी के मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज हुई पहली एफआईआर के बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, ट्रस्ट के महासचिव के चालक बताए जा रहे टिन्नू यादव की तलाश जारी है। मामले में कई अन्य लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

पुलिस ने अब तक लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब चढ़ावे की रकम में कथित अनियमितताओं को लेकर मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।

CCTV फुटेज के आधार पर दर्ज हुई पहली FIR

सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच के दौरान कुछ लोग चढ़ावे की राशि में कथित हेरफेर करते दिखाई दिए थे। इसी आधार पर ट्रस्ट की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई। बताया जा रहा है कि यह इस पूरे मामले में दर्ज की गई पहली एफआईआर है।

हाल ही में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसके बाद मामले में कार्रवाई की रफ्तार और तेज हो गई है।

एफआईआर में 8 नामजद आरोपी, कुछ अज्ञात भी शामिल

ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में आठ लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। साथ ही कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, जिन लोगों का सीधे तौर पर नकदी के संग्रह और प्रबंधन से संबंध था, उनके नाम एफआईआर में शामिल किए गए हैं।

एफआईआर में जिन लोगों को नामजद किया गया है, उनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्र, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और करुणेश पांडे शामिल हैं। हालांकि, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम एफआईआर में नहीं है।

इन धाराओं में दर्ज किया गया मामला

जानकारी के अनुसार, यह एफआईआर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज की गई है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के तहत केस दर्ज किया गया है।

इन धाराओं में आपराधिक साजिश, विश्वासघात, चोरी की संपत्ति से संबंधित अपराध, चोरी की संपत्ति को छिपाने या उसके लेन-देन में सहयोग करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। कुछ धाराओं में दोष सिद्ध होने पर आजीवन कारावास तक का प्रावधान भी है।

दो दिन पहले एसआईटी ने सौंपी थी प्रारंभिक रिपोर्ट

चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ियों और गबन के आरोप सामने आने के बाद 13 जून को राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। जांच दल ने लगातार छह दिनों तक मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और पांच दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की।

जांच के दौरान दान राशि की गिनती, उसके रखरखाव, सुरक्षा व्यवस्था और कथित अनियमितताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की गई। एसआईटी अध्यक्ष विजय विश्वास पंत ने स्पष्ट किया था कि अभी केवल प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी गई है और जांच कई बिंदुओं पर जारी है। अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद सरकार को सौंप दी जाएगी।

जांच के बाद राम मंदिर में बदली गई पूरी व्यवस्था

एसआईटी की जांच के बाद मंदिर परिसर में दान राशि के संग्रह और गिनती की प्रक्रिया में कई अहम बदलाव किए गए हैं। पहले जिन कर्मचारियों के पास यह जिम्मेदारी थी, उन्हें फिलहाल अन्य कार्यों में लगाया गया है।

अब नकदी की गिनती के कार्य में मंदिर के विश्वसनीय कर्मचारियों के साथ बैंक के नए कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नया सीसीटीवी निगरानी तंत्र स्थापित किया गया है। सभी कैश काउंटिंग क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है और इसके लिए अलग नियंत्रण कक्ष भी बनाया गया है।

काउंटिंग रूम में प्रवेश के नियम हुए सख्त

दान राशि की गिनती वाले कक्ष में प्रवेश और निकास को लेकर भी सुरक्षा मानकों को और कड़ा कर दिया गया है। अब कर्मचारियों को पूरी तलाशी के बाद ही प्रवेश दिया जाएगा। बाहर निकलते समय भी अनिवार्य जांच की व्यवस्था लागू की गई है।

सूत्रों के मुताबिक, बैंक में नकदी जमा कराने के दौरान अब तीन स्तर पर क्रॉस वेरिफिकेशन किया जाएगा। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर अनिवार्य किए गए हैं, ताकि प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को रोका जा सके।

 

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