पति ने छोड़ी TMC, पत्नी बोलीं- ‘दीदी मेरी दुर्गा हैं’; बंगाल की सियासत में सामने आई अनोखी तस्वीर

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक संकट के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक ओर जहां वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है, वहीं उनकी पत्नी और विधायक नयना बंदोपाध्याय अब भी ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा पर कायम हैं। पति-पत्नी के अलग-अलग राजनीतिक रास्ते चुनने की यह घटना बंगाल की राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है।

तृणमूल कांग्रेस में जारी बगावत के बीच सामने आई इस स्थिति ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। खास बात यह है कि पति के पार्टी छोड़ने के बावजूद नयना बंदोपाध्याय ने साफ शब्दों में कहा है कि उनका तृणमूल कांग्रेस छोड़ने का कोई इरादा नहीं है।

सांसद पति ने बदला राजनीतिक ठिकाना

राजनीतिक घटनाक्रम के तहत उत्तर कोलकाता से सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने पार्टी से अलग होकर बागी खेमे का रुख किया। इसके बाद उन्होंने अन्य बागी सांसदों के साथ मिलकर नए राजनीतिक मंच का समर्थन करने का फैसला किया।

इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या उनकी पत्नी नयना बंदोपाध्याय भी वही रास्ता अपनाएंगी। हालांकि जल्द ही इन अटकलों पर विराम लग गया।

‘दीदी को नहीं छोड़ सकती’

नयना बंदोपाध्याय ने स्पष्ट कहा कि वह ममता बनर्जी के साथ थीं, हैं और आगे भी रहेंगी। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता।

उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि ममता बनर्जी उनके लिए केवल एक राजनीतिक नेता नहीं हैं, बल्कि वह उन्हें अपनी ‘दुर्गा’ मानती हैं। नयना ने कहा कि यदि दीदी उन्हें छोड़ भी दें, तब भी वह उनका साथ नहीं छोड़ेंगी।

पार्टी के कुछ नेताओं पर जताई नाराजगी

अपने बयान में नयना बंदोपाध्याय ने यह भी कहा कि पार्टी के कुछ सदस्यों की ओर से उनके खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणियां की गईं, जिससे उन्हें दुख पहुंचा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने अपनी शिकायत पार्टी नेतृत्व तक पहुंचा दी है और उचित कार्रवाई की उम्मीद जताई है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ व्यक्तियों के व्यवहार के कारण उनकी पार्टी और नेतृत्व के प्रति निष्ठा प्रभावित नहीं होगी।

पति ने कहा- फैसला उनका व्यक्तिगत अधिकार

दूसरी ओर, सुदीप बंदोपाध्याय ने पत्नी के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें अपने साथ आने के लिए समझाने की कोशिश की थी, लेकिन नयना अपने निर्णय पर कायम रहीं।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पति-पत्नी अलग-अलग राजनीतिक दलों में रहकर भी अपनी-अपनी विचारधारा के अनुसार काम कर सकते हैं। नयना का फैसला उनका व्यक्तिगत निर्णय है और वह उसका सम्मान करते हैं।

बंगाल की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना मामला

तृणमूल कांग्रेस में जारी उठापटक के बीच यह मामला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद एक ही परिवार के दो प्रमुख चेहरे अलग-अलग राजनीतिक राहों पर खड़े दिखाई दे रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम बंगाल की मौजूदा सियासत की जटिलता और बदलते समीकरणों को भी दर्शाता है, जहां व्यक्तिगत रिश्तों और राजनीतिक फैसलों के बीच स्पष्ट अंतर देखने को मिल रहा है।

 

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