रांची: झारखंड राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नथवाणी के नामांकन पत्र को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस और भाजपा के बीच खुली राजनीतिक जंग में बदल गया है। नामांकन पत्र की जांच के दौरान सामने आई कथित विसंगतियों को लेकर दोनों दल एक-दूसरे पर हमलावर हैं।
मामला इतना गरमा गया कि बुधवार को झारखंड विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों प्रमुख दलों के नेता और कार्यकर्ता विरोध-प्रदर्शन करते नजर आए। कांग्रेस जहां नामांकन रद्द करने की मांग पर अड़ी है, वहीं भाजपा इसे राजनीतिक हताशा करार दे रही है।
नामांकन पत्र पर उठे सवाल, बढ़ा सियासी विवाद
राज्यसभा चुनाव के लिए परिमल नथवाणी के नामांकन पत्र की स्क्रूटनी के दौरान कुछ कथित विसंगतियां सामने आने के बाद उनके नामांकन को फिलहाल होल्ड पर रखा गया था। इसके बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर मोर्चा खोल दिया।
कांग्रेस नेताओं और विधायकों ने विधानसभा के मुख्य प्रवेश द्वार पर प्रदर्शन करते हुए चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। पार्टी का आरोप है कि नामांकन पत्र में गंभीर त्रुटियां होने के बावजूद उम्मीदवार को अतिरिक्त समय दिया जा रहा है।
कांग्रेस ने लगाए शपथ पत्र में गड़बड़ी के आरोप
कांग्रेस का दावा है कि परिमल नथवाणी के शपथ पत्र में दो अलग-अलग स्थानों पर नाम अलग-अलग तरीके से दर्ज किया गया है। इसके अलावा पार्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) से जुड़ा आवश्यक विवरण जमा नहीं किया गया।
कांग्रेस प्रत्याशी की ओर से इस संबंध में आपत्ति दर्ज कराते हुए आवेदन भी दिया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नियमों के अनुसार नामांकन पत्र को अस्वीकार किया जाना चाहिए।
विधानसभा के बाहर भाजपा का पलटवार
दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया है। विधानसभा के बाहर भाजपा कार्यकर्ताओं ने झारखंड की गठबंधन सरकार और कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन किया।
भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक स्थिति कमजोर पड़ती दिख रही है, इसलिए वह नामांकन प्रक्रिया को विवादित बनाने की कोशिश कर रही है।
इरफान अंसारी ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
झारखंड सरकार में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग भाजपा के दबाव में काम कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस का पक्ष रखने के लिए आने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद को प्रक्रिया में शामिल होने से रोका गया, जिस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई।
बाबूलाल मरांडी का कांग्रेस पर हमला
भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने विधानसभा परिसर में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कांग्रेस दोनों सीटों पर जीत का दावा कर रही थी, लेकिन अब परिस्थितियां बदलती देखकर भाजपा समर्थित उम्मीदवार का नामांकन रद्द कराने की कोशिश कर रही है।
विधानसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने भी पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए विधानसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं को विधानसभा गेट पर रोका गया और कांग्रेस समर्थकों को खुली छूट दी गई।
उन्होंने कहा कि विधानसभा परिसर में कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मर्यादा बनाए रखने के लिए अध्यक्ष को संज्ञान लेना चाहिए।
विधानसभा परिसर बना राजनीतिक अखाड़ा
दिनभर चले विरोध-प्रदर्शन के दौरान विधानसभा परिसर का माहौल बेहद गर्म रहा। कांग्रेस और भाजपा के नेता आमने-सामने बैठकर नारेबाजी करते रहे। राज्यसभा चुनाव से पहले यह विवाद झारखंड की राजनीति में नए सियासी समीकरणों और तनाव का संकेत माना जा रहा है।
अब सभी की नजरें चुनावी प्रक्रिया और नामांकन पर अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जो राज्यसभा चुनाव के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
