नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय ग्राहकों की नजर अब सिर्फ डिजाइन और फीचर्स पर नहीं, बल्कि माइलेज और रनिंग कॉस्ट पर टिक गई है। यही वजह है कि देश में हाई माइलेज कारों की मांग तेजी से बढ़ रही है। छोटे परिवार, रोजाना ऑफिस जाने वाले लोग और टैक्सी ऑपरेटर्स अब ऐसी कारों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो कम ईंधन में ज्यादा दूरी तय कर सकें। इस सेगमेंट में मारुति सुजुकी की कारें लगातार दबदबा बनाए हुए हैं, जबकि हुंडई और टाटा भी मजबूत विकल्प पेश कर रही हैं।
मारुति सेलेरियो: माइलेज की क्वीन बनी सबसे आगे
माइलेज के मामले में मारुति सुजुकी सेलेरियो को सबसे आगे माना जा रहा है। इसका पेट्रोल वेरिएंट करीब 26 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज देता है, जबकि इसका CNG मॉडल लगभग 34 किलोमीटर प्रति किलोग्राम तक का औसत देने में सक्षम है। कम मेंटेनेंस और आसान सर्विसिंग इसे पहली कार खरीदने वालों और छोटे परिवारों के लिए बेहद लोकप्रिय विकल्प बनाते हैं।
मारुति वैगनआर: भरोसे और माइलेज का कॉम्बिनेशन
मारुति वैगनआर लंबे समय से भारतीय बाजार में भरोसेमंद फैमिली कार के रूप में अपनी जगह बनाए हुए है। इसका पेट्रोल मॉडल करीब 25 किलोमीटर प्रति लीटर और CNG वेरिएंट लगभग 34 किलोमीटर प्रति किलोग्राम तक का माइलेज देने में सक्षम है। इसका स्पेशियस केबिन और आरामदायक सीटिंग इसे शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों में भी बेहद लोकप्रिय बनाता है।
स्विफ्ट और डिजायर: युवाओं और फैमिली दोनों की पसंद
मारुति स्विफ्ट अपने स्पोर्टी लुक और बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए युवाओं के बीच खास पहचान रखती है। यह कार करीब 25 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज देती है। वहीं मारुति डिजायर बेहतर बूट स्पेस और कम रनिंग कॉस्ट के कारण टैक्सी सेगमेंट में बेहद लोकप्रिय है। इसका CNG वेरिएंट 33 किलोमीटर प्रति किलोग्राम से अधिक माइलेज देने में सक्षम माना जाता है।
CNG कारों की बढ़ती डिमांड ने बदली बाजार की तस्वीर
भारत में CNG कारों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। पेट्रोल कार जहां प्रति किलोमीटर अधिक खर्च कराती है, वहीं CNG कारें काफी कम लागत में चलती हैं। खासकर दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और अहमदाबाद जैसे शहरों में CNG नेटवर्क के विस्तार ने इस सेगमेंट को और मजबूत किया है।
हुंडई और टाटा भी बन रहे मजबूत विकल्प
हुंडई ग्रैंड आई10 निओस का CNG वेरिएंट बेहतर कम्फर्ट और फीचर्स के कारण पसंद किया जा रहा है। वहीं टाटा टियागो और टाटा अल्ट्रोज मजबूत बिल्ड क्वालिटी और सेफ्टी फीचर्स की वजह से ग्राहकों का भरोसा जीत रही हैं। टाटा की CNG कारें खासकर सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले खरीदारों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं।
कार खरीदते समय सिर्फ माइलेज नहीं, ये बातें भी जरूरी
विशेषज्ञों के मुताबिक कार खरीदते समय सिर्फ माइलेज नहीं, बल्कि मेंटेनेंस कॉस्ट, रीसेल वैल्यू और सर्विस नेटवर्क भी बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। मारुति की कारें रीसेल वैल्यू में आगे मानी जाती हैं, जबकि हुंडई और टाटा अपने फीचर्स और सेफ्टी के कारण अलग पहचान रखती हैं।
हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों की ओर बढ़ता रुझान
ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच अब लोग धीरे-धीरे हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर भी बढ़ रहे हैं। हालांकि इनकी शुरुआती कीमत अधिक है, लेकिन लंबी अवधि में ये कम रनिंग कॉस्ट के कारण किफायती साबित होते हैं।
निष्कर्ष
माइलेज कारों की यह रेस अब सिर्फ कंपनियों के बीच नहीं, बल्कि ग्राहकों की जरूरतों के हिसाब से भी बदल रही है। आने वाले समय में CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक सेगमेंट में और भी विकल्प देखने को मिल सकते हैं, जो भारतीय ऑटो बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल सकते हैं।
