क्या महंगा होने वाला है आपका लोन? महंगाई के बढ़ते खतरे के बीच RBI के अगले कदम पर टिकी नजर

मुंबई: देश में बढ़ती महंगाई और ईंधन की लगातार बढ़ रही कीमतों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में लोगों की ईएमआई बढ़ सकती है। अगले महीने होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक से पहले ब्याज दरों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि रेटिंग एजेंसी इक्रा का मानना है कि फिलहाल आरबीआई रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में तेजी के साथ मानसून को लेकर बनी अनिश्चितता ने महंगाई का जोखिम बढ़ा दिया है। इसके बावजूद जून में होने वाली एमपीसी बैठक में केंद्रीय बैंक रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है।

फिलहाल राहत, लेकिन आगे बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

इक्रा की रिपोर्ट के मुताबिक अगर आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव बना रहता है, तो साल के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी संभव हो सकती है। यानी फिलहाल होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वालों को राहत मिल सकती है, लेकिन आगे चलकर ईएमआई महंगी होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि अभी की स्थिति कोविड काल से अलग है। उनके मुताबिक यह सप्लाई से जुड़ी अस्थायी समस्या है, न कि मांग और आपूर्ति दोनों में आई व्यापक गिरावट जैसी स्थिति।

उन्होंने कहा कि आरबीआई फिलहाल दूसरे दौर की महंगाई के असर के स्पष्ट संकेतों का इंतजार करेगा, उसके बाद ही किसी सख्त कदम पर विचार किया जाएगा।

महंगाई अनुमान बढ़ाया गया

हाल ही में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद इक्रा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई यानी सीपीआई का अनुमान बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। यह आरबीआई के मध्यम अवधि के लक्ष्य से अधिक माना जा रहा है।

इसके बावजूद एजेंसी का अनुमान है कि आगामी दो मौद्रिक नीति समीक्षाओं में रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम है। हालांकि अक्टूबर में आरबीआई के रुख में बदलाव देखने को मिल सकता है और जरूरत पड़ने पर दिसंबर की नीति समीक्षा में ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं।

दिसंबर 2025 में हुई थी आखिरी कटौती

भारतीय रिजर्व बैंक ने आखिरी बार दिसंबर 2025 में रेपो रेट में बदलाव किया था। उस समय केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी, जिसके बाद यह घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया था।

रेपो रेट वही दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। इसमें बदलाव का सीधा असर आम लोगों के लोन और ईएमआई पर पड़ता है।

अब क्या देख रहे हैं विशेषज्ञ?

आर्थिक जानकारों का कहना है कि आने वाले महीनों में ईंधन कीमतें, मानसून की स्थिति और खाद्य महंगाई आरबीआई के फैसलों में अहम भूमिका निभाएंगे। अगर महंगाई लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो केंद्रीय बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ सकता है।

 

Related posts