मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में बड़ा बदलाव: अब ऑनलाइन ट्रेनिंग के बाद ही मिलेगा 5 लाख रुपये का ब्याजमुक्त लोन, सिस्टम हुआ और सख्त

लखनऊ: मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत युवाओं को मिलने वाले बिना ब्याज के 5 लाख रुपये तक के लोन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब किसी भी अभ्यर्थी को लोन तभी जारी किया जाएगा जब वह निर्धारित ऑनलाइन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लेगा और बैंक को इसका प्रमाणपत्र प्राप्त हो जाएगा।

लोन से पहले अनिवार्य होगा 30 घंटे का प्रशिक्षण
नई व्यवस्था के अनुसार, लोन स्वीकृत होने के बाद आवेदक को चुनिंदा तीन संस्थानों में से किसी एक के जरिए 30 घंटे का ऑनलाइन प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा। यह प्रशिक्षण पांच दिनों में पूरा किया जाएगा और इसमें विशेषज्ञों द्वारा सेक्टर आधारित मार्गदर्शन दिया जाएगा। अंतिम दिन लाइव सत्र भी आयोजित होगा, जिसमें आवेदकों के सवालों के जवाब दिए जाएंगे।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ही बैंक करेगा भुगतान
प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र ऑनलाइन सीधे बैंक को भेजा जाएगा, जिसके बाद बैंक लोन की राशि आवेदक के खाते में ट्रांसफर करेगा। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए फेस रिकग्निशन तकनीक भी लागू की गई है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके।

बड़ी संख्या में आवेदन और बैंक स्वीकृति का आंकड़ा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 28 अप्रैल तक इस योजना के तहत 5,30,487 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 4,48,577 आवेदन बैंक को भेजे गए, जिनमें से लगभग 1,80,756 आवेदनों को स्वीकृति मिली। अब तक 1,68,516 आवेदकों को कुल 5,913.13 करोड़ रुपये का लोन वितरित किया जा चुका है। हालांकि करीब 2.67 लाख आवेदन बैंक स्तर पर स्वीकृत नहीं हो पाए थे, जिनमें प्रोजेक्ट रिपोर्ट और तकनीकी खामियां मुख्य कारण बताई गईं।

प्रशिक्षण व्यवस्था में भी बड़ा सुधार
योजना के तहत प्रशिक्षण के लिए समाधान समिति, यूपीआईकॉन और उद्यमिता विकास संस्थान को चुना गया है। इन संस्थानों को 25-25 जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशिक्षण मॉड्यूल एनसीवीटी के पाठ्यक्रम पर आधारित है और बैंक द्वारा स्वीकृत सेक्टर के अनुसार विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया जाता है।

पंजीकरण से पहले वीडियो देखना अनिवार्य
नई व्यवस्था में पोर्टल पर पंजीकरण से पहले आवेदकों को 30 मिनट का काउंसलिंग वीडियो देखना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके जरिए उन्हें उनके चुने गए व्यवसाय और लोन प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी जाती है। विभाग की ओर से प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई जा रही है।

कौशल प्रशिक्षण व्यवस्था में बड़ी कार्रवाई
इधर कौशल विकास मिशन के तहत लापरवाही करने वाली 400 प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों को हटा दिया गया है। जांच में पाया गया कि कई संस्थानों में मानक के अनुसार लैब और प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं और कई जगह मनमाने ढंग से प्रशिक्षण चल रहा था।

अब पूरी तरह डिजिटल निगरानी सिस्टम लागू
प्रशिक्षण की निगरानी के लिए कौशल दृष्टि पोर्टल लागू किया गया है, जिसमें जियो टैगिंग और फोटो अपलोडिंग अनिवार्य है। सरकार का कहना है कि अब पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जा रहा है, ताकि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सके और योजना का सही लाभ उन्हें प्राप्त हो।

 

Related posts