पाकिस्तान पर गंभीर आरोप से मचा कूटनीतिक भूचाल, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच एयरबेस को लेकर रिपोर्ट ने बढ़ाई हलचल

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में पहले से ही जारी तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। आरोप है कि पाकिस्तान ने अमेरिकी हवाई हमलों से बचाने के लिए ईरानी विमानों को अपने एयरफील्ड्स पर शरण दी थी। इस दावे के सामने आने के बाद अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों पर भी सवाल उठने लगे हैं।

सीबीएस रिपोर्ट में बड़ा दावा, ईरानी विमानों को मिली कथित सुरक्षा
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट सीबीएस न्यूज के हवाले से सामने आए दावे में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने में मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने ईरानी विमानों को अपने एयरफील्ड्स पर रखने की अनुमति दी थी, ताकि वे संभावित अमेरिकी हमलों से बच सकें। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान ने अपने नागरिक विमानों को अफगानिस्तान में भी सुरक्षित स्थानों पर पार्क किया था।

नूर खान एयरबेस को लेकर भी उठा विवाद
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में सीजफायर की घोषणा के बाद ईरान ने कथित तौर पर पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर एक टोही और खुफिया विमान समेत कई विमान भेजे थे। हालांकि, इस दावे को पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने खारिज करते हुए कहा है कि नूर खान एयरबेस आबादी वाले इलाके में स्थित है और वहां इतने बड़े विमान बेड़े को छिपाकर रखना संभव नहीं है।

ट्रंप प्रशासन और सीजफायर प्रस्ताव पर भी बयानबाजी तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए सीजफायर प्रस्ताव को खारिज करते हुए उसे अव्यावहारिक बताया है। ट्रंप ने यह भी कहा है कि ईरान के ऐसे प्रस्तावों का अमेरिका पर कोई दबाव नहीं पड़ेगा और उन्होंने अमेरिका की संभावित जीत को लेकर भरोसा जताया है।

अमेरिकी राजनीति में भी बढ़ी प्रतिक्रिया
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिका में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी माने जाने वाले सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि यह रिपोर्ट सही साबित होती है, तो पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका की गंभीर समीक्षा जरूरी होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इजरायल को लेकर पाकिस्तान के कुछ पूर्व बयानों को देखते हुए यह मामला और गंभीर हो सकता है।

पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल
पाकिस्तान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने का दावा करता रहा है, लेकिन इस नए विवाद ने उसकी कूटनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।

तनाव के बीच बढ़ी अंतरराष्ट्रीय चिंता
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव के बीच यह नया विवाद स्थिति को और जटिल बना सकता है। फिलहाल सभी पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

 

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