डिग्री नहीं, स्किल चाहिए! लखनऊ समिट ने बदल दिया करियर का फॉर्मूला

अजमल शाह
अजमल शाह

डिग्री लेकर भी नौकरी नहीं मिल रही… अब सिस्टम बदलने की बात हो रही है। लखनऊ में एक ऐसा समिट हुआ, जहां किताबों से ज्यादा स्किल्स की बात हुई। और जो बातें वहां सामने आईं… वो हर छात्र के भविष्य को सीधे बदल सकती हैं।

लखनऊ बना एजुकेशन का नया पावर सेंटर

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित एडइनबॉक्स रीजनल हायर एजुकेशन समिट 2026 ने यह साफ कर दिया कि लखनऊ अब सिर्फ प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि एजुकेशन का उभरता हुआ हब बन चुका है। इस आयोजन में देशभर के शिक्षाविद, यूनिवर्सिटी प्रतिनिधि, स्कूल लीडर्स, नीति निर्माता और छात्र एक साथ जुटे, जहां पढ़ाई को सीधे करियर और इंडस्ट्री से जोड़ने पर गंभीर चर्चा हुई। भारत में डिग्री की वैल्यू घट रही है… और स्किल की कीमत तेजी से बढ़ रही है।

थ्योरी नहीं… अब प्रैक्टिकल का दौर

समिट का उद्घाटन डॉ. आदर्श कुमार ने किया, जिन्होंने अपने संबोधन में साफ कहा कि आज के समय में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उन्होंने छात्रों के लिए प्रैक्टिकल स्किल्स, रिसर्च ओरिएंटेशन और वैज्ञानिक सोच को जरूरी बताया। उनका संदेश सीधा था—अगर आप सिर्फ किताबों तक सीमित रहेंगे, तो करियर की रेस में पीछे रह जाएंगे।

फॉरेंसिक साइंस—करियर का नया हीरो

इस समिट का सबसे बड़ा आकर्षण फॉरेंसिक साइंस रहा, जहां विशेषज्ञों ने DNA प्रोफाइलिंग, डिजिटल फॉरेंसिक, टॉक्सिकोलॉजी और फिंगरप्रिंट एनालिसिस जैसे विषयों को आसान और प्रैक्टिकल तरीके से समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे छोटे-छोटे वैज्ञानिक सबूत बड़े अपराधों को सुलझाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाते हैं।

जहां इंसानी गवाही कमजोर पड़ती है… वहां साइंस सच को सामने लाता है।

AI और स्किल-बेस्ड एजुकेशन—भविष्य की असली कुंजी

समिट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नई शिक्षा नीति और स्किल-बेस्ड एजुकेशन पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य उन्हीं छात्रों का होगा जो सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि इंडस्ट्री-रेडी स्किल्स के साथ आगे बढ़ेंगे। AI, डेटा एनालिटिक्स और क्रिएटिव फील्ड्स में तेजी से बढ़ते अवसरों को भी विस्तार से समझाया गया।

स्कूल से यूनिवर्सिटी तक—अब कनेक्शन जरूरी

समिट में आयोजित Principal Meet, Academic Leadership Dialogue और School–University Connect जैसे सेशंस ने यह दिखाया कि शिक्षा अब अलग-अलग स्तरों पर बंटी हुई नहीं रह सकती। स्कूल, कॉलेज और इंडस्ट्री के बीच मजबूत तालमेल ही छात्रों को सही दिशा दे सकता है। अगर यह कनेक्शन मजबूत नहीं हुआ, तो शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई और बढ़ेगी। एजुकेशन सिस्टम अगर जुड़ा नहीं… तो स्टूडेंट्स का भविष्य बिखर जाएगा।

स्टूडेंट्स को मिला डायरेक्ट करियर गाइडेंस

यह समिट सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्रों को इंटरैक्टिव सेशंस और करियर काउंसलिंग के माध्यम से सीधे एक्सपर्ट्स से सीखने का मौका मिला। इससे छात्रों को यह समझने में मदद मिली कि उन्हें किस फील्ड में कैसे आगे बढ़ना है और किन स्किल्स पर काम करना जरूरी है।

सम्मान भी, सीख भी

कार्यक्रम का संचालन RJ पुनीत और मनीषा ने किया, जिनकी ऊर्जा ने पूरे आयोजन को जीवंत बनाए रखा। इस दौरान ‘Principal Award of Honor’ के तहत शिक्षाविदों को सम्मानित भी किया गया। यह आयोजन सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली में बदलाव की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुआ।

क्या भारत तैयार है इस बदलाव के लिए?

समिट ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया—क्या भारत का एजुकेशन सिस्टम इस तेजी से बदलते दौर के साथ खुद को ढाल पाएगा? क्योंकि अगर बदलाव को समय रहते अपनाया नहीं गया, तो लाखों छात्र सिर्फ डिग्री लेकर रह जाएंगे, लेकिन उनके पास स्किल्स नहीं होंगी। भविष्य उन लोगों का नहीं जो सिर्फ पढ़े हैं…भविष्य उनका है जो सीखकर आगे बढ़े हैं। लखनऊ का यह समिट एक संकेत है कि एजुकेशन का भविष्य बदल रहा है। अब डिग्री से ज्यादा स्किल की अहमियत है, और वही छात्रों को आगे ले जाएगी। अंत में फैसला छात्रों को करना है क्या वो पुराने सिस्टम के साथ चलेंगे… या नए दौर के लिए खुद को तैयार करेंगे? आने वाला समय डिग्री नहीं पूछेगा… वो सिर्फ आपकी काबिलियत मापेगा।

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