
कभी-कभी एक शब्द पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर देता है। 14 मार्च को हुई सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में भी कुछ ऐसा ही हुआ। Uttar Pradesh Police Recruitment and Promotion Board की परीक्षा में सामान्य हिंदी खंड का एक सवाल अचानक सोशल मीडिया का सबसे बड़ा ट्रेंड बन गया।
सवाल था, “अवसर के अनुसार बदल जाने वाले के लिए एक शब्द बताइए।”
विकल्प थे — पंडित, अवसरवादी, निष्कपट और सदाचारी।
सही उत्तर ‘अवसरवादी’ था, लेकिन विवाद इस बात पर भड़क गया कि ‘पंडित’ को विकल्पों में क्यों रखा गया।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा-अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल
परीक्षा खत्म होने के कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। अभ्यर्थियों का कहना था कि ‘पंडित’ शब्द हिंदू परंपरा में विद्वान और गुरु का सम्मानजनक प्रतीक है।
उसे अवसरवादिता जैसे संदर्भ में विकल्प के रूप में रखना भाषाई और सांस्कृतिक दृष्टि से गलत है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय ने इसे “समुदाय विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला” बताया।
Abhijat Mishra ने सीएम को लिखा गया पत्र
मामला धीरे-धीरे परीक्षा हॉल से निकलकर राजनीति के दरवाजे तक पहुंच गया। Yogi Adityanath को संबोधित एक पत्र में भाजपा प्रदेश मंत्री Abhijat Mishra ने इस सवाल पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रश्न की संरचना ही गलत है और इससे अनावश्यक विवाद पैदा हुआ है।
पत्र में तीन मांगें रखी गईं सवाल को रद्द किया जाए। प्रश्न बनाने वाली समिति की जांच हो। भविष्य में ऐसे मामलों से बचने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बने।


दूसरे दलों ने भी दी प्रतिक्रिया- शब्द की गरिमा पर बहस
इस विवाद पर Suheldev Bharatiya Samaj Party के राष्ट्रीय प्रवक्ता Piyush Mishra ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा “पंडित शब्द विद्वता और ज्ञान का प्रतीक है, इसे अवसरवादिता से जोड़ना भारतीय बौद्धिक परंपरा का अपमान है।”
उनकी मांग थी कि भर्ती बोर्ड इस पर माफी मांगे और सुधार करे।
भर्ती बोर्ड की चुप्पी- जांच की चर्चा
अब तक भर्ती बोर्ड की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सवाल की समीक्षा शुरू हो चुकी है।यदि बोर्ड समय रहते इस पर फैसला नहीं करता, तो विवाद भर्ती प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है।
भाषा, परीक्षा और संवेदनशीलता- विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञ प्रभाष बहादुर का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शब्दों का चयन बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए। क्योंकि लाखों युवाओं की परीक्षा में छोटी-सी गलती भी बड़े विवाद का कारण बन सकती है।
सवाल सिर्फ एक विकल्प का नहीं है यह भाषा, संस्कृति और संवेदनशीलता के संतुलन का मामला भी है।
कभी-कभी परीक्षा के सवाल सिर्फ अभ्यर्थियों को नहीं, पूरे सिस्टम को भी टेस्ट कर देते हैं।
UP SI परीक्षा विवाद: “अवसरवादी कौन?” सवाल में ‘पंडित’ विकल्प पर बवाल
