
मिडिल ईस्ट में मिसाइलों और तनाव की खबरें जब टीवी स्क्रीन पर चमकती हैं, तो भारत के लाखों घरों में एक ही सवाल उठता है—“गैस सिलेंडर मिलेगा या नहीं?”
रसोई की आग और कार की टंकी… दोनों का रिश्ता सीधे अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़ा है। लेकिन इस बार सरकार ने साफ शब्दों में कहा है—घबराने की जरूरत नहीं है, भारत की ऊर्जा सप्लाई लाइन पूरी तरह सुरक्षित है।
ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का बड़ा भरोसा
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव Sujata Sharma ने साफ किया कि देश में कच्चे तेल से लेकर LPG तक किसी भी ईंधन की कमी नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत की रिफाइनरियां फुल कैपेसिटी पर काम कर रही हैं और पेट्रोल पंपों पर भी किसी तरह की कमी की रिपोर्ट नहीं है।सरकार का दावा है कि भारत अपने पेट्रोल और डीजल की जरूरतों को बड़े पैमाने पर घरेलू उत्पादन से पूरा कर रहा है।
फारस की खाड़ी से राहत की खबर
ऊर्जा संकट की चर्चा के बीच शिपिंग मंत्रालय ने भी बड़ी जानकारी दी। मंत्रालय के अधिकारी Rajesh Kumar Sinha के मुताबिक फारस की खाड़ी में मौजूद 611 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं।
सबसे अहम खबर यह है कि दो बड़े LPG जहाज— Shivalik LPG Carrier और Nanda Devi LPG Carrier सफलतापूर्वक Strait of Hormuz पार कर चुके हैं।
ये जहाज 92,700 मीट्रिक टन LPG लेकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं।
कब पहुंचेगी गैस की खेप
सरकारी जानकारी के मुताबिक पहला जहाज Mundra Port पर 16 मार्च को पहुंचेगा। दूसरा जहाज Kandla Port पर 17 मार्च को पहुंचेगा।
खाड़ी क्षेत्र में इस समय 22 भारतीय जहाज मौजूद हैं और सरकार लगातार नाविकों और उनके परिवारों से संपर्क बनाए हुए है।
LPG से PNG की तरफ बड़ा शिफ्ट
ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सरकार एक और रणनीति पर काम कर रही है। जहां कमर्शियल सेक्टर में LPG की मांग ज्यादा है, वहां पाइप गैस यानी PNG को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इसके लिए GAIL (India) Limited ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के साथ अहम बैठक भी की है। योजना साफ है— LPG पर दबाव कम करो और PNG को तेज़ी से फैलाओ।
पैनिक बुकिंग ने बढ़ाई परेशानी
सरकार का कहना है कि असली समस्या सप्लाई नहीं, बल्कि घबराहट है। जहां रोजाना LPG बुकिंग लगभग 7.5 मिलियन होती थी, वहीं अब यह बढ़कर 8.8 मिलियन तक पहुंच गई है। यानी लोग पहले से ज्यादा सिलेंडर बुक कर रहे हैं।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि “पैनिक बुकिंग से बचें, सप्लाई चेन पूरी तरह सुरक्षित है।”
एक्सपर्ट क्या कहते हैं
ऊर्जा क्षेत्र के विश्लेषक Amit Mittal कहते हैं, “भारत ने पिछले एक दशक में अपनी ऊर्जा सप्लाई चेन को काफी मजबूत किया है। रणनीतिक तेल भंडार, विविध आयात स्रोत और मजबूत रिफाइनरी नेटवर्क हमें वैश्विक संकट से काफी हद तक बचाते हैं।”
उनके मुताबिक “मिडिल ईस्ट तनाव जरूर चिंता का विषय है, लेकिन भारत की ऊर्जा रणनीति अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।”
असली कहानी क्या है?
सच यह है कि दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल हमेशा रहती है। लेकिन हर संकट के समय एक अफवाह भी जन्म लेती है—“गैस खत्म हो जाएगी।” इस बार भी वही कहानी दोहराई जा रही है।
फर्क सिर्फ इतना है कि सरकार का दावा है— टैंकर समुद्र में चल रहे हैं, रिफाइनरियां धुआं उड़ा रही हैं और भारत की रसोई की आग फिलहाल सुरक्षित है।
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