
मिडिल ईस्ट में युद्ध का दसवां दिन… और ऐसा लग रहा है जैसे पूरी दुनिया किसी बारूद के गोदाम के ऊपर बैठी है। मिसाइलें उड़ रही हैं, ड्रोन आसमान में घूम रहे हैं और तेल की कीमतें ऐसे उछल रही हैं जैसे शेयर बाजार में अचानक किसी ने रॉकेट लगा दिया हो। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि कौन जीत रहा है, सवाल यह है कि इस आग की लपटें आखिर कहां तक जाएंगी।
जंग का दसवां दिन: तबाही का फैलता नक्शा
Israel और Iran के बीच जारी संघर्ष अब पूरे मिडिल ईस्ट को अपनी चपेट में ले चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले दस दिनों में हजारों नागरिक ठिकाने निशाना बने और सैकड़ों घर तबाह हो गए। इस संघर्ष में सिर्फ दो देश नहीं, बल्कि लगभग पूरा क्षेत्र किसी न किसी तरह से प्रभावित होता दिखाई दे रहा है।
ड्रोन, मिसाइल और तेल: युद्ध का नया समीकरण
जंग अब सिर्फ सीमा पर नहीं लड़ी जा रही। ड्रोन हमले, मिसाइल स्ट्राइक और तेल ठिकानों पर हमले इस संघर्ष को आर्थिक युद्ध में भी बदल रहे हैं। Saudi Arabia ने अपने तेल क्षेत्रों की सुरक्षा बढ़ा दी है, जबकि Bahrain में रिफाइनरी पर हमले के बाद सायरन बजाने पड़े।
सत्ता और संदेश: नया सुप्रीम लीडर
ईरान में सत्ता का समीकरण भी तेजी से बदलता दिखाई दिया जब Mojtaba Khamenei को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया। यह फैसला ऐसे समय आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को चेतावनी दी थी कि नेतृत्व का फैसला सावधानी से किया जाए।
लेकिन तेहरान ने साफ संदेश दिया कि उसकी राजनीति का फैसला बाहर से नहीं होगा।

तेल बाजार में हलचल
इस युद्ध का सबसे बड़ा असर तेल बाजार पर दिख रहा है। G7 देशों की बैठक में आपातकालीन तेल भंडार जारी करने पर चर्चा हो रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर तेल की आपूर्ति बाधित होती है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
क्या यह युद्ध और फैल सकता है
मिडिल ईस्ट का इतिहास बताता है कि यहां की हर लड़ाई का असर सीमाओं से बाहर जाता है। अगर ड्रोन हमले, तेल ठिकानों पर हमले और क्षेत्रीय ताकतों की भागीदारी बढ़ती रही तो यह संघर्ष और व्यापक हो सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इसी सवाल पर टिकी हैं
कि यह आग कब और कैसे थमेगी।
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