
मिडिल ईस्ट में जंग की आग भले जमीन पर जल रही हो, लेकिन उसकी तपिश अब एयरपोर्ट काउंटर तक पहुंच गई है। पिछले एक हफ्ते में दुबई जाने वाली फ्लाइट्स के किराए ऐसे उछले हैं कि कई यात्रियों ने टिकट बुकिंग ही टाल दी। ट्रैवल एजेंट बता रहे हैं कि कुछ रूट पर किराया 60 से 80 फीसदी तक बढ़ गया है, जबकि यूरोप जाने वाली टिकटें भी 40 फीसदी तक महंगी हो चुकी हैं। सीधी बात जंग वहां है, लेकिन जेब यहां हल्की हो रही है।
आखिर अचानक क्यों भाग गए हवाई टिकट के दाम
यह सिर्फ यात्रियों की भीड़ का मामला नहीं है। असली खेल ऊपर आसमान में चल रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ते ही कई देशों ने सुरक्षा कारणों से अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। जब एयरस्पेस बंद होता है तो एयरलाइंस को सीधा रास्ता छोड़कर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है।
लंबा रूट मतलब ज्यादा ईंधन, ज्यादा उड़ान समय और ज्यादा ऑपरेशन खर्च। एयरलाइन का खर्च बढ़ा तो टिकट के दाम भी उड़ान भरने लगे।
‘जंग का बीमा’ भी बढ़ा रहा टिकट का बोझ
एविएशन इंडस्ट्री में एक खास खर्च होता है—वॉर रिस्क इंश्योरेंस। जब किसी इलाके में युद्ध या तनाव होता है तो वहां से गुजरने वाली उड़ानों के लिए एयरलाइंस को ज्यादा प्रीमियम देना पड़ता है। मिडिल ईस्ट संकट के बाद इस इंश्योरेंस का खर्च अचानक बढ़ गया है।
सीधी भाषा में समझिए एयरलाइन ज्यादा पैसे दे रही है और उसका बिल आखिरकार यात्री के टिकट में जुड़ रहा है।
दुबई रूट पर सबसे ज्यादा असर
ट्रैवल एजेंटों के मुताबिक इस समय सबसे ज्यादा मार दुबई रूट पर पड़ी है। तनाव के दौरान रद्द होने वाली फ्लाइट्स में करीब 50 से 65 फीसदी उड़ानें इसी रूट से जुड़ी होती हैं। यही वजह है कि टिकटों की कीमत तेजी से ऊपर चली गई।
दिल्ली से फ्रैंकफर्ट जैसे व्यस्त रूट पर इकॉनमी क्लास का किराया कई जगह डेढ़ लाख रुपये के पार पहुंच चुका है। कुछ फ्लाइट्स में सीटें मिलना भी मुश्किल हो गया है।

ट्रैवल कंपनियां खोज रही नया रास्ता
ट्रैवल इंडस्ट्री भी हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठी है। कई कंपनियां अब री-रूटिंग सर्विस दे रही हैं, यानी यात्रियों को वैकल्पिक रास्तों से यात्रा कराने की कोशिश हो रही है।
कुछ एजेंसियां रिफंडेबल होटल और अतिरिक्त ट्रैवल इंश्योरेंस भी ऑफर कर रही हैं ताकि फ्लाइट कैंसिल होने पर यात्रियों का पूरा ट्रिप खराब न हो।
यात्रियों के लिए काम की सलाह
ट्रैवल एक्सपर्ट साफ कह रहे हैं इस समय जल्दबाजी में टिकट बुक करना महंगा पड़ सकता है। अगर डायरेक्ट फ्लाइट बहुत महंगी है तो कनेक्टिंग फ्लाइट या दूसरे शहरों के रूट तलाशना बेहतर हो सकता है।
संभव हो तो 10 से 15 दिन इंतजार करना समझदारी होगी, क्योंकि फिलहाल ज्यादातर टिकट प्रीमियम कीमत पर बिक रहे हैं। और हां, इस समय ट्रैवल इंश्योरेंस लेना लगभग जरूरी हो गया है ताकि फ्लाइट कैंसिल होने पर जेब खाली न हो।
छुट्टियों की प्लानिंग पर पड़ा सीधा असर
मिडिल ईस्ट में जो कुछ हो रहा है उसका असर अब साफ दिखने लगा है। जो लोग विदेश घूमने का प्लान बना रहे थे, उन्हें अब बजट दोबारा देखना पड़ रहा है। कह सकते हैं—जंग वहां चल रही है, लेकिन उसका असर पूरी दुनिया के आसमान में दिखाई दे रहा है।
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