
बुलंदशहर के दरियापुर गांव से आने वाली नाबिया परवेज ने UPSC 2025 में ऑल इंडिया रैंक 29 हासिल कर जिले को गर्व करने का मौका दिया है।
एक किसान परिवार से आने वाली नाबिया ने यह साबित कर दिया कि मेहनत का कोई बैकग्राउंड नहीं होता।
आज नाबिया दिल्ली में रहकर सिविल सेवा की तैयारी कर रही थीं और जैसे ही परिणाम आया, गांव में खबर बिजली की तरह फैल गई। गांव की गलियों में लोग कह रहे थे “हमारे गांव की बेटी अब देश चलाने वालों में शामिल होगी।”
चपरासी की बेटी बनी अफसर
स्याना के इंदिरा गांधी इंटर कॉलेज के चपरासी प्रेमचंद की बेटी शिखा सिंह की कहानी भी कम प्रेरणादायक नहीं है। दूसरे प्रयास में शिखा ने UPSC में 113वीं रैंक हासिल की। उनकी मां पढ़ी-लिखी नहीं हैं, लेकिन बेटी के सपनों पर उन्हें हमेशा भरोसा था।
गांव के पब्लिक स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाली शिखा ने दिल्ली में कोचिंग लेकर अपना सपना पूरा किया। आज उनके घर पर मिठाइयों के डिब्बे खुल रहे हैं और लोग एक ही बात कह रहे हैं “चपरासी की बेटी अब IAS बनेगी।”
किसान के बेटे की मेहनत रंग लाई
डूंगरा जाट गांव के किसान परिवार से आने वाले विपिन राजौरा ने भी UPSC में शानदार प्रदर्शन करते हुए 538वीं रैंक हासिल की। विपिन की सफलता ने गांव के युवाओं को यह भरोसा दिया है कि मेहनत और लक्ष्य साफ हो तो UPSC जैसी कठिन परीक्षा भी जीती जा सकती है।

व्यापारी के बेटे ने भी लहराया परचम
सिकंद्राबाद के कपड़ा व्यापारी मुल्कराज भाटिया के बेटे पारस भाटिया ने UPSC में 937वीं रैंक हासिल की है। पारस फिलहाल ग्रेटर नोएडा में ग्रामोद्योग विभाग में कार्यरत हैं और नौकरी के साथ तैयारी कर रहे थे। उनकी सफलता ने यह भी दिखा दिया कि नौकरी करते हुए भी सिविल सेवा का सपना पूरा किया जा सकता है।
बुलंदशहर में जश्न का माहौल
चार युवाओं की इस ऐतिहासिक सफलता से पूरे बुलंदशहर जिले में उत्सव जैसा माहौल है। परिवार, रिश्तेदार और पड़ोसी मिठाइयां बांटकर खुशी मना रहे हैं। यह कहानी सिर्फ चार सफल उम्मीदवारों की नहीं है यह उस भरोसे की कहानी है कि छोटे शहरों और गांवों से भी देश के बड़े अफसर निकलते हैं। और शायद यही वजह है कि आज बुलंदशहर के कई घरों में एक नया सपना जन्म ले रहा है “अगली बार UPSC में हमारा नंबर होगा।”
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