
बिहार की सियासी हलचल अब कैंपस की गलियों में भी सुनाई दे रही है। Patna University छात्रसंघ चुनाव के नतीजों ने इस बार छात्र राजनीति को नई दिशा दे दी है।
इस चुनाव में National Students’ Union of India यानी NSUI ने अध्यक्ष और महासचिव जैसे अहम पदों पर कब्जा जमाकर अपना दबदबा कायम रखा। वहीं Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad ने संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष पद जीतकर मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
अध्यक्ष पद पर NSUI की बड़ी जीत
अध्यक्ष पद पर शांतनु शेखर ने 2896 वोट हासिल कर जदयू के प्रिंस कुमार को 1496 वोटों के भारी अंतर से हराया। जीत के बाद उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय Rahul Gandhi और सांसद Pappu Yadav के मार्गदर्शन को दिया।
उन्होंने कहा कि कैंपस में शिक्षा व्यवस्था सुधारना और सकारात्मक माहौल बनाना उनकी प्राथमिकता होगी। छात्र राजनीति में यह बयान कम और रोडमैप ज्यादा लगता है।
उपाध्यक्ष और महासचिव: कांटे की टक्कर
उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी शिफत फैज़ ने 1568 वोट पाकर छात्र जदयू के आयुष हर्ष को मात्र 71 वोटों से हराया। यह मुकाबला इतना करीबी था कि हर वोट की अहमियत साफ नजर आई।
महासचिव पद पर NSUI की खुशी कुमारी ने 2164 वोट हासिल कर निर्दलीय प्रत्युष राज को 553 वोटों से हराया। यह जीत दिखाती है कि कैंपस में संगठन की पकड़ अभी भी मजबूत है।
ABVP की एंट्री: दो पदों पर जीत
ABVP के अभिषेक कुमार ने संयुक्त सचिव पद पर 2143 वोट पाकर NSUI के मनोवर आज़म को 392 वोटों से हराया। वहीं हर्षवर्धन को कोषाध्यक्ष चुना गया।

उनका फोकस स्पष्ट है बेहतर प्लेसमेंट, मजबूत फैकल्टी और छात्र हित में फैसले। कैंपस अब घोषणाओं का मंच नहीं, प्रदर्शन की प्रयोगशाला बनने वाला है।
Patna University का छात्रसंघ चुनाव हमेशा से बिहार की मुख्यधारा राजनीति का ट्रेलर माना जाता रहा है। यहां के पोस्टर कभी-कभी विधानसभा के पोस्टरों से ज्यादा जोश में दिखते हैं।
सवाल यह है कि क्या यह जीतें सिर्फ बैनर और जुलूस तक सीमित रहेंगी, या वाकई लाइब्रेरी, लैब और प्लेसमेंट सेल तक असर दिखेगा?
राजनीति अगर कैंपस में आए तो बहस लाए, बैर नहीं।
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