
Middle East में तनाव की लपटें फिर तेज़ हो गई हैं। ईरान ने साफ किया है कि उसका निशाना दुबई, बहरीन, कतर, कुवैत या सऊदी अरब नहीं थे, बल्कि इन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने थे।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने NBC News को दिए इंटरव्यू में बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि तेहरान ने पहले ही फारस की खाड़ी के अपने सहयोगी देशों से संपर्क कर स्पष्ट कर दिया था “हमारा इरादा आप पर हमला करने का नहीं है। Self-defense में हम अमेरिका के सैन्य ठिकानों को टारगेट कर रहे हैं।”
क्या है पूरा मामला?
हालिया Israel-US strikes के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में Gulf region में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। इन ठिकानों की मौजूदगी कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों में है।
अराघची का कहना है, “ईरान चुप नहीं बैठ सकता, जब उसके दुश्मन के सैन्य ठिकाने उसके पड़ोस में सक्रिय हों। लेकिन Gulf देशों को यह नहीं समझना चाहिए कि हमला उन पर हुआ है।”
रणनीति या संदेश?
Geopolitical experts मानते हैं कि यह “Calculated Escalation” है। ईरान सीधे तौर पर अरब देशों से टकराव नहीं चाहता, लेकिन अमेरिका को संदेश देना चाहता है “अगर आप हमला करेंगे, तो जवाब आपके ठिकानों पर मिलेगा, चाहे वो कहीं भी हों।”

यह Middle East की जटिल राजनीति का क्लासिक उदाहरण है—जहाँ जमीन किसी और की, ठिकाना किसी और का, और टकराव तीसरे का होता है।
Israel Factor
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ता टकराव भी है। Washington और Tel Aviv की रणनीतिक साझेदारी के चलते Tehran खुद को घिरा हुआ महसूस करता है।
Satirical तौर पर कहें तो Gulf देशों की स्थिति “Landlord की है, और किरायेदार की लड़ाई में दीवारें उन्हीं की दरक रही हैं।”
