
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal को दिल्ली शराब नीति केस में बड़ी कानूनी राहत मिली है। Rouse Avenue Court ने उन्हें और पूर्व डिप्टी सीएम Manish Sisodia को आरोपों से बरी कर दिया।
फैसले के तुरंत बाद मीडिया से बातचीत करते हुए केजरीवाल भावुक हो गए और बोले, “मैं भ्रष्ट नहीं हूं… मैंने सिर्फ ईमानदारी कमाई है।”
राजनीति में आंसू दुर्लभ नहीं, लेकिन टाइमिंग हमेशा हेडलाइन बन जाती है।
कोर्ट का क्या था कहना?
अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) पर्याप्त सबूत पेश करने में विफल रही। आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य नहीं मिले। चार्जशीट में खामियां बताई गईं। किसी गवाह के बयान से आपराधिक साजिश साबित नहीं हुई। कोर्ट ने टिप्पणी की फेयर ट्रायल के लिए फेयर इन्वेस्टिगेशन जरूरी है।
मीडिया से केजरीवाल का बयान
केजरीवाल ने कहा, सच हमेशा जीतता है और आज सच की जीत हुई। भारतीय न्याय प्रणाली पर भरोसा था कि इंसाफ मिलेगा। हमारी पार्टी को खत्म करने की साजिश रची गई।
उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व पर राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया। सियासी बयानबाज़ी और कानूनी राहत—दोनों साथ-साथ चले।

राजनीतिक संदेश या व्यक्तिगत क्षण?
जब एक पूर्व मुख्यमंत्री कैमरों के सामने रोता है, तो वह सिर्फ भावनात्मक दृश्य नहीं होता वह एक राजनीतिक फ्रेम भी होता है। आलोचक इसे “सहानुभूति कार्ड” कह सकते हैं, समर्थक “ईमानदारी की जीत”। लेकिन अदालत के आदेश ने फिलहाल एक बड़ा नैरेटिव बदल दिया है।
आरोप बनाम सबूत
भारतीय राजनीति में जांच एजेंसियां और अदालतें अक्सर आमने-सामने की कहानी का हिस्सा बनती हैं।
यह फैसला याद दिलाता है आरोप सुर्खियां बना सकते हैं, लेकिन अदालत में सुर्खियों से ज्यादा वजन सबूत का होता है। अब सवाल यह है कि क्या यह फैसला आने वाले चुनावों में नई ऊर्जा देगा? या यह अध्याय यहीं खत्म होगा?
फिलहाल इतना तय है दिल्ली की राजनीति में यह फैसला लंबे समय तक गूंजेगा।
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