
हर साल बजट के दिन कुछ राज्यों के लिए “hope” आती है, और कुछ के हिस्से सिर्फ “hope speech”। इस बार पंजाब के साथ वही हुआ—बड़े वादे, भारी शब्द और ज़मीन पर zero assurance।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ शब्दों में कहा, “Budget Punjab की उम्मीदों पर नहीं, बल्कि ignoring mode पर खरा उतरा।”
MSP: हर बार ज़िक्र, हर बार Zero Guarantee
किसानों के नाम पर भाषण ज़रूर हुआ, लेकिन MSP की कानूनी गारंटी? Completely एब्सेंट। AAP सरकार का कहना है कि जो राज्य देश का पेट भरता है, वही राज्य बजट में सबसे ज़्यादा भूखा छोड़ा जाता है।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने तंज कसते हुए कहा, “Coconut, Cashew और Sandalwood दिख गया, लेकिन Wheat-Rice उगाने वाला किसान invisible रहा।”
Agriculture Infrastructure: PowerPoint में मजबूत, Budget में कमजोर
Agriculture Infrastructure Fund में no real hike, Market yards और storage systems—no solid roadmap। मतलब साफ है: किसान को reform चाहिए, लेकिन budget को reform से allergy है।
Jobs & Youth: Slogans Unlimited, Opportunities Limited
Punjab का youth पहले ही unemployment pressure में है। Budget से उम्मीद थी—skill, industry, incentives। मिला क्या? Silence with statistics.
मंत्री अमन अरोड़ा बोले, “यह बजट नहीं, disappointment document है।”
Flood, Diversification और Ground Reality—सब Skip
हर साल बाढ़ से जूझने वाले किसान? Crop diversification की ज़रूरत? Sustainable farming? Budget ने इन सबको ‘Next Year’ folder में डाल दिया।
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां ने कहा, “देश का अन्न भंडार भरने वालों के लिए roadmap नहीं, सिर्फ rhetoric है।”
Punjab vs Step-Mother Syndrome
AAP नेताओं का आरोप एक सुर में, “Punjab को लगातार सौतेली माँ जैसा ट्रीट किया जा रहा है।”

कुलदीप सिंह धालीवाल, लालजीत भुल्लर, लाल चंद कटारुचक और डॉ. रवजोत सभी ने एक ही सवाल उठाया, जब Punjab हर national crisis में front foot पर रहता है, तो budget के समय पीछे क्यों धकेला जाता है?
Budget का पंजाबी Version
Punjabi कहावत में कहें तो “पटिया पहाड़, निकलेआ चूहा।”
नील गर्ग का कहना है, “Figures flashy हैं, but relief imaginary है।”
Big corporates के लिए red carpet, Farmers और middle class के लिए waiting room।
Budget Passed, Trust Failed
Central Budget 2025 ने numbers ज़रूर पेश किए, लेकिन Punjab के लिए vision absent रहा।
AAP का साफ संदेश है, “Punjab अपने दम पर आगे बढ़ेगा, लेकिन discrimination को normalize नहीं करेगा।”
आने वाले दिनों में यह मुद्दा सिर्फ politics नहीं, Punjab की economic dignity का सवाल बनेगा।
Budget Shock: धड़ाम हुआ बाजार, कुछ ही मिनटों में ₹8 लाख करोड़ स्वाहा
