अस्पतालों में संस्कार भी! MP में ‘Garbh Sanskar Kaksh’ का ऐलान

सत्येन्द्र सिंह ठाकुर
सत्येन्द्र सिंह ठाकुर

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर ऐसा ऐलान किया है, जो अस्पताल की चारदीवारी के भीतर सोच बदलने का संकेत देता है। अब राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में ‘गर्भ संस्कार कक्ष’ बनाए जाएंगे। यानी इलाज सिर्फ दवाओं और इंजेक्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गर्भवती महिलाओं के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी बराबर ध्यान दिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि मां की सोच और माहौल, बच्चे की सेहत की पहली ईंट होती है—और अगर नींव मजबूत होगी, तो इमारत अपने आप खड़ी हो जाएगी।

गर्भ संस्कार कक्ष आखिर है क्या?

गर्भ संस्कार कक्ष कोई पूजा-पाठ वाला कमरा नहीं, बल्कि एक ऐसा space होगा जहां modern medicine और traditional wisdom साथ चलेंगे। यहां गर्भवती महिलाओं को मेडिकल सलाह के साथ-साथ योग, आयुर्वेद, संतुलित आहार और मानसिक शांति से जुड़ा मार्गदर्शन मिलेगा।

सीधा सा फॉर्मूला है— कम तनाव + बेहतर सोच = स्वस्थ शिशु। और इस फॉर्मूले को अब अस्पताल के सिस्टम में फिट किया जा रहा है।

मां की सोच, बच्चे का भविष्य

डॉक्टर और विशेषज्ञ पहले से मानते आए हैं कि pregnancy के दौरान मां का मानसिक संतुलन बच्चे के विकास पर असर डालता है। फर्क बस इतना है कि अब यह बात फाइलों से निकलकर अस्पताल के कमरों तक पहुंच रही है।

इन कक्षों में शांति, हल्की रोशनी और सकारात्मक वातावरण पर जोर दिया जाएगा, ताकि महिला सिर्फ मरीज न महसूस करे—बल्कि खुद को सुरक्षित और सुना हुआ पाए।

मेडिकल पढ़ाई में भी होगा बदलाव

मुख्यमंत्री ने यह साफ किया कि यह पहल सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगी। मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भी गर्भ संस्कार को पढ़ाया जाएगा, ताकि आने वाले डॉक्टर इसे अंधविश्वास नहीं बल्कि holistic healthcare tool की तरह समझें।

जब डॉक्टर शरीर के साथ मन को भी पढ़ना सीखेंगे, तभी इलाज पूरा माना जाएगा—वरना रिपोर्ट तो मशीन भी पढ़ लेती है।

विज्ञान और संस्कृति का मिलन

सरकार का फैसला है कि नए अस्पतालों के नक्शे में गर्भ संस्कार कक्ष पहले से शामिल होंगे और पुराने अस्पतालों में भी इनके लिए अलग जगह बनाई जाएगी। आधुनिक रिसर्च भी मानने लगी है कि गर्भ में पल रहे शिशु पर बाहरी वातावरण का गहरा असर पड़ता है।

यानी विज्ञान अब वही कह रहा है, जो संस्कृति सदियों से फुसफुसाती आई है—बस अब उसे माइक्रोफोन मिल गया है।

आज के अस्पतालों में जहां अक्सर मरीज को फाइल नंबर बना दिया जाता है, वहीं यह पहल कहती है— “डिलीवरी सिर्फ तारीख से नहीं, माहौल से भी होती है।”

अगर यह मॉडल जमीन पर ठीक से उतरा, तो मध्य प्रदेश मातृ और शिशु स्वास्थ्य में सिर्फ योजनाओं से नहीं, सोच से भी देश को दिशा दिखा सकता है।

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