
मुंबई नगर निगम (BMC) के नतीजे आते ही मायानगरी की राजनीति सड़क से हटकर सीधे पांच सितारा होटलों में शिफ्ट हो गई है। एकनाथ शिंदे ने अपने 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को होटल में ‘किलाबंद’ तो कर दिया है, लेकिन असली डर अब सियासी सेंधमारी का है।
यही वजह है कि अब सुरक्षा केवल होटल तक सीमित नहीं रही—पार्टी ने काग़ज़ी पहरा भी बैठाने का फैसला किया है।
हॉर्स ट्रेडिंग से बचाव का नया हथियार: डॉक्यूमेंटेशन
शिवसेना (शिंदे गुट) के सूत्रों के मुताबिक, दलबदल की हर संभावना को खत्म करने के लिए आज सभी पार्षदों से जुड़े दस्तावेज़ी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। साथ ही, पार्षद दल के नेता के नाम का ऐलान भी आज संभव है।
युवा लेकिन संगठनात्मक रूप से मजबूत चेहरों—यामिनी जाधव, तृष्णा विश्वासराव और अमे घोले—के नाम शीर्ष जिम्मेदारियों के लिए चर्चा में हैं।
BMC का नंबर गेम: बहुमत है, लेकिन सवाल बाकी
227 सदस्यीय BMC सदन में BJP: 89 सीटें, शिंदे शिवसेना: 29 सीटें। महायुति कुल: 118+ (स्पष्ट बहुमत)।
वहीं विपक्ष में शिवसेना (UBT): 65, MNS: 6, NCP (SP): 1, कुल: 72 सीटें।
कांग्रेस (24), AIMIM (8) और SP (2) जुड़ जाएं तो भी विपक्ष 106 तक ही पहुंचता है—अब भी बहुमत से 8 कम।
असली लड़ाई: मेयर की कुर्सी
BMC में दशकों से शिवसेना का मेयर रहा है। अब एकनाथ शिंदे पर दबाव है कि मेयर उनकी पार्टी का हो—ताकि “असली शिवसेना” का दावा मजबूत किया जा सके।

दूसरी तरफ, BJP भी पीछे हटने के मूड में नहीं है। राजनीतिक संदेश साफ है—BMC में पहली बार BJP मेयर। हालांकि, CM देवेंद्र फडणवीस कह चुके हैं कि मेयर के नाम पर फैसला NDA के भीतर आपसी सहमति से होगा।
उद्धव गुट का तंज: ‘टाइगर अभी जिंदा है’
शिवसेना (UBT) लगातार शिंदे पर हमला बोल रही है। उद्धव ठाकरे का कहना है—जो एक बार पार्टी तोड़ सकता है, वह दोबारा भी कर सकता है।
संजय राउत ने तंज कसते हुए कहा:
“BJP अपने मेयर की बात करती है, शिंदे के पास पूरे 30 पार्षद भी नहीं… लेकिन खैर, मज़ा लेना भी राजनीति का हिस्सा है।”
संख्या शिंदे-BJP के पास है, लेकिन मुंबई का मेयर सिर्फ अंकगणित नहीं, सियासी प्रतीक भी है। यही वजह है कि पार्षद होटल में हैं और राजनीति काग़ज़ों में।
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