
राजधानी लखनऊ में सोमवार सुबह एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया। अयोध्या रोड स्थित रोहतास इन्क्लेव में अचानक लगी आग ने खुशहाल घर को चंद मिनटों में मातम में बदल दिया। धुएं और आग की लपटों से घिरी एक महिला ने जान बचाने के लिए दूसरी मंजिल से छलांग लगा दी—लेकिन यह छलांग जिंदगी की नहीं, मौत की ओर थी।
मोमबत्ती से भड़की आग, दुआ बनी हादसा
मृतका की पहचान 45 वर्षीय निदा रिजवी के रूप में हुई है। परिवार के मुताबिक, फज्र में निदा नजर उतारने के लिए उठीं थीं। घर के पीछे वाले कमरे में मोमबत्ती जलाई गई, जो गिरकर कार्पेट पर जा लगी। कुछ ही मिनटों में आग फैल गई और घना धुआं पूरे फ्लैट में भर गया। जब तक परिवार कुछ समझ पाता, हालात हाथ से निकल चुके थे।
परिवार की हालत: कोई झुलसा, कोई बचा, कोई बिछड़ गया
फ्लैट में उस वक्त पति सैय्यद मोहम्मद अम्मार रिजवी, बेटी जारा, बेटा जोहराब मौजूद थे।
बेटा किसी तरह बाहर निकल आया। बेटी को दमकलकर्मियों ने सुरक्षित रेस्क्यू किया। पति आग में झुलस गए—चेहरे और हाथ जले हैं, अस्पताल में इलाज चल रहा है। निदा… बच नहीं सकीं।
“नीचे धुआं है, उतर नहीं सकती…” आखिरी गुहार
पड़ोसियों के मुताबिक, निदा बालकनी में खड़ी होकर मदद की गुहार लगा रही थीं। उन्होंने कहा— “नीचे धुआं भरा है, सीढ़ियों से नहीं उतर पा रही हूं।”
लोग सीढ़ी लाने दौड़े, लेकिन तभी लकड़ी का ढांचा गिर पड़ा और निदा नीचे गिर गईं। मौके पर मौजूद लोग कुछ पल के लिए सन्न रह गए।
दो घंटे की जंग, पांच दमकल गाड़ियां
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची। शुरुआत में दो गाड़ियां लगीं, लेकिन आग ने विकराल रूप ले लिया। इसके बाद तीन और दमकल वाहन बुलाने पड़े। दमकलकर्मियों ने BA सेट पहनकर धुएं से भरे फ्लैट में प्रवेश किया और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

राख के बीच मिले 11 लाख रुपये
आग बुझाने के दौरान एक अलमारी से 11 लाख रुपये नकद 500-500 के नोटों की गड्डियां बरामद हुईं। हालांकि फ्लैट का लगभग पूरा सामान जलकर खाक हो चुका था। दीवारों का प्लास्टर गिर गया और घर रहने लायक नहीं बचा।
कौन थीं निदा रिजवी?
निदा सिर्फ एक गृहिणी नहीं थीं— वह Kids जी स्कूल चलाती थीं, पढ़ी-लिखी और सम्मानित महिला थीं। पति पेशे से वकील हैं। बेटी जारा अमेरिका में MBBS की पढ़ाई कर रही है और उसी दिन शाम को उसकी फ्लाइट थी।
घर में तैयारियों का माहौल था… लेकिन किसे पता था कि सुबह ऐसी अंतिम विदाई लेकर आएगी।
कभी-कभी खतरा बाहर से नहीं आता, वह घर के कोने में जलती छोटी सी मोमबत्ती बनकर आता है। और शहर फिर पूछता है— “क्या हम fire safety को सिर्फ हादसे के बाद याद करेंगे?”
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