ED आई, ममता आईं, सियासत भड़की—IPAC रेड ने बंगाल में आग लगा दी!

Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

पश्चिम बंगाल की राजनीति गुरुवार को उस वक्त उबाल पर आ गई, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता में राजनीतिक रणनीतिकार संस्था IPAC के दफ्तर पर छापेमारी की। यह वही IPAC है, जिसे तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव 2026 के लिए हायर किया है।

रेड खत्म होते-होते मामला सिर्फ जांच एजेंसी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ED बनाम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीधी टक्कर में बदल गया।

ED का दावा: हवाला और कोयला तस्करी का लिंक

ED के मुताबिक, यह कार्रवाई PMLA के तहत पश्चिम बंगाल और दिल्ली में कुल 10 ठिकानों पर की गई। जांच एजेंसी का दावा है कि IPAC का कनेक्शन अनूप माजी उर्फ लाला के नेतृत्व वाले कोयला तस्करी सिंडिकेट से जुड़े हवाला नेटवर्क से है।

ED सूत्रों के अनुसार— अवैध कोयला बिक्री से आया पैसा। राजनीतिक कंसल्टेंसी के जरिए घुमाया गया। 2022 के गोवा चुनाव और अब बंगाल 2026 तक पहुंचा। ED का कहना है कि यह “रूटीन मनी लॉन्ड्रिंग जांच” है, न कि किसी पार्टी को निशाना बनाने की कार्रवाई।

ED का बड़ा आरोप: ममता बनर्जी ने जांच में दखल दिया

मामले ने तब नया मोड़ लिया, जब ED ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिस अधिकारियों के साथ IPAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं और वहां से जरूरी दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज ले गईं।

ED के मुताबिक, इसके बाद CM का काफिला IPAC ऑफिस भी पहुंचा, जहां कथित तौर पर फाइलें और हार्ड डिस्क हटाई गईं। इसी मुद्दे पर अब ED हाईकोर्ट पहुंच गई है, जहां शुक्रवार को सुनवाई संभव है।

ममता बनर्जी का पलटवार: “BJP डकैत है”

IPAC ऑफिस से बाहर निकलते ही ममता बनर्जी का गुस्सा कैमरों पर फूट पड़ा। उन्होंने BJP को “डकैत पार्टी”, “डेमोक्रेसी की हत्यारी” बताते हुए आरोप लगाया कि ED और SIR के जरिए चुनाव से पहले TMC को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है।

ममता ने ऐलान किया कि पूरे बंगाल में विरोध प्रदर्शन होंगे TMC कार्यकर्ता जहां हैं, वहीं धरने देंगे। मतलब साफ—यह लड़ाई कोर्ट से ज्यादा सड़क पर लड़ी जाएगी।

विपक्षी बयानबाज़ी: आरोपों की बरसात

BJP

BJP सांसद संजय जायसवाल ने दावा किया कि IPAC एक “राजनीतिक मनी मैनेजमेंट मशीन” बन चुका है और काले धन को सफेद करने का काम कर रहा है।

कांग्रेस

कांग्रेस प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने इसे चुनावी टाइमिंग से जोड़ते हुए कहा कि BJP जब भी चुनाव देखती है, ED भेज देती है।

TMC

महुआ मोइत्रा ने इसे “BJP की ऑफिशियल डराने-धमकाने वाली विंग” करार दिया और कहा कि ED स्ट्रैटेजी डॉक्यूमेंट्स तक पहुंचना चाहती है।

IPAC भी पहुंची हाईकोर्ट

ED की कार्रवाई के खिलाफ IPAC ने भी हाईकोर्ट का रुख किया है और तुरंत रेड रोकने की मांग की है। अब मामला जांच एजेंसी, राज्य सरकार और न्यायपालिका—तीनों के बीच फंस चुका है।

IPAC पर ED की रेड अब सिर्फ कानूनी जांच नहीं रही। यह बन चुकी है— 2026 बंगाल चुनाव का सेमीफाइनल जहां एक तरफ एजेंसियां हैं दूसरी तरफ सत्ता और सियासत।

अब असली सवाल यही है— यह जांच भ्रष्टाचार तक पहुंचेगी या राजनीति में उलझकर रह जाएगी?

ठंड इतनी कि किताबें भी कांप गईं! नोएडा-गाजियाबाद में स्कूल 10 जनवरी तक बंद

Related posts

Leave a Comment