
बांग्लादेश की राजनीति के एक लंबे अध्याय का अंत हो गया। पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया को अंतिम विदाई देने के लिए ढाका में देश-विदेश से नेता पहुंचे। माहौल भावुक था, लेकिन हर आंख भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर पर टिकी हुई थी।
कारण साफ था— जयशंकर सिर्फ श्रद्धांजलि देने नहीं आए थे, वो बिना बोले बहुत कुछ कहने आए थे।
Final Goodbye में भारत की मौजूदगी
ढाका एयरपोर्ट पर जयशंकर का स्वागत भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने किया। अंतिम संस्कार में वह भारत सरकार और 140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
उन्होंने खालिदा जिया को श्रद्धांजलि दी। BNP नेता और बेटे तारिक रहमान से मुलाकात की।
Diplomatic circles में इसे सिर्फ condolence नहीं, Political signal के तौर पर देखा गया।
Mohammed Yunus से मुलाकात क्यों नहीं हुई?
सबसे बड़ा सवाल यही है— जयशंकर ढाका में थे, लेकिन अंतरिम सरकार के Chief Advisor मोहम्मद युनूस से नहीं मिले।
कोई joint statement नहीं कोई courtesy call नहीं कोई closed-door meeting नहीं Experts कहते हैं: This was deliberate, not accidental.
Silence as Strategy: India का Quiet Message
Foreign policy analysts के मुताबिक, युनूस के नेतृत्व में बनी अंतरिम व्यवस्था अल्पसंख्यकों पर हमलों को रोकने में नाकाम, कानून-व्यवस्था पर कमजोर पकड़, राजनीतिक वैधता पर सवाल।
भारत ने सार्वजनिक टकराव नहीं किया आलोचना नहीं की खामोशी के जरिए असहमति जता दी।
Diplomacy में कभी-कभी न मिलना, मिलने से ज्यादा बड़ा संदेश होता है।
Balance & Stability First: Delhi की Policy
भारत का रुख साफ है लोकतांत्रिक प्रक्रिया का समर्थन। लेकिन हर नए सिस्टम की stability और intent की जांच। इसलिए फिलहाल Top-level engagement pause पर है।
India is watching, not reacting.
BNP पर बढ़ती नजर?
जयशंकर की तारिक रहमान से मुलाकात ने संकेत दे दिया कि भारत सिर्फ एक दरवाजे पर निर्भर नहीं रहना चाहता। BNP की हालिया कोशिशें कट्टरपंथी सहयोगियों से दूरी। “Bangladesh First” नैरेटिव, India के लिए एक potential reset option मानी जा रही हैं।
Strategic experts मानते हैं कि यह visit:
- Bangladesh establishment को subtle warning
- Political players को reassurance
- Region को stability-first signal
देने के लिए काफी है।
ढाका में सवाल पूछा जा रहा है— “जयशंकर क्यों नहीं मिले?”
Delhi में जवाब है— “जब जवाब चाहिए हो, तब silence सबसे तेज़ बोलता है।”
South Asia में भारत अब Loud diplomacy नहीं Layered diplomacy खेल रहा है। जहां हर handshake भी headline है और हर missed handshake भी।
भारत का बम डिस्पोजल स्टैंडर्ड, IED और ग्रेनेड अब नहीं कर पाएंगे नुकसान

