
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा संगठनात्मक फैसला सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को यूपी भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है। पार्टी ने औपचारिक ऐलान के साथ साफ कर दिया है कि संगठन की कमान अब ऐसे चेहरे को दी गई है, जो सत्ता और संगठन—दोनों को साधना जानता है।
निर्विरोध चुनाव: जब मुकाबला होना ही नहीं था
पंकज चौधरी का अध्यक्ष बनना कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। हकीकत यह है कि उनके खिलाफ किसी और ने नामांकन ही दाखिल नहीं किया।
नामांकन के वक्त उनके साथ खुद सीएम योगी आदित्यनाथ मौजूद थे, जबकि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य प्रस्तावक बने। मंच पर पार्टी के बड़े संगठनात्मक चेहरे भी मौजूद थे—मतलब संदेश साफ था, यह फैसला सर्वसम्मति का है, संघर्ष का नहीं।
मोदी–योगी–शाह के भरोसेमंद चेहरे
पंकज चौधरी उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्हें PM मोदी, CM योगी और अमित शाह—तीनों का भरोसा हासिल है। सरकार में रहते हुए भी उन्होंने संगठन से दूरी नहीं बनाई और शायद यही वजह है कि भाजपा ने यूपी जैसे बड़े राज्य के लिए “safe pair of hands” चुना।
पंकज चौधरी ही क्यों? यहां समझिए BJP का गणित
पंकज चौधरी कुर्मी बिरादरी से आते हैं और वह यूपी भाजपा के चौथे कुर्मी प्रदेश अध्यक्ष हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में कुर्मी समाज से जुड़े 11 सांसद संसद पहुंचे, जिनमें भाजपा की हिस्सेदारी सीमित रही। अब पार्टी नहीं चाहती कि यह वोट बैंक और बिखरे। पंकज चौधरी का चयन दरअसल संगठन से ज्यादा समाज को जोड़ने की रणनीति है।
पार्षद से प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर
पंकज चौधरी का राजनीतिक सफर नीचे से ऊपर तक गया है।
उन्होंने:
- पार्षद के तौर पर राजनीति शुरू की
- गोरखपुर में डिप्टी मेयर बने
- महाराजगंज से 7 बार सांसद चुने गए
उन्होंने 1991 से लेकर 2024 तक कई चुनाव जीते, जबकि 1999 और 2009 में हार का सामना भी किया। आज वह दूसरी बार केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री हैं—यानी सत्ता का अनुभव भी और संगठन की समझ भी।

परिवार, विरासत और कारोबार
पंकज चौधरी का परिवार भी सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय रहा है। उनके पिता भगवती प्रसाद चौधरी बड़े जमींदार रहे, मां उज्ज्वला चौधरी जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं। पत्नी भाग्यश्री चौधरी समाजसेवा से जुड़ी हैं। इसके अलावा पंकज चौधरी ‘राहत रूह’ आयुर्वेदिक तेल कंपनी के मालिक भी हैं—यानि राजनीति के साथ business sense भी मौजूद है।
संगठन बदला, लेकिन सवाल वही
प्रदेश अध्यक्ष बदल गया है, चेहरा नया है, लेकिन सवाल पुराने ही हैं—
- 2027 की तैयारी कितनी मजबूत होगी?
- जातीय संतुलन कितना टिकेगा?
- और संगठन सरकार से कितनी दूरी या नज़दीकी रखेगा?
राजनीति में कुर्सी बदलती है, लेकिन उम्मीदें हमेशा वही रहती हैं।
पंकज चौधरी का यूपी भाजपा अध्यक्ष बनना सिर्फ एक नियुक्ति नहीं है, यह संदेश, संतुलन और रणनीति—तीनों का मिश्रण है। अब असली परीक्षा मैदान में होगी, जहां संगठन को सिर्फ संभालना नहीं, जिताना भी होगा।
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