
इंडिगो एयरलाइन का संकट जैसे-जैसे गहराता गया, वैसे-वैसे यात्रियों के सब्र का मीटर भी ओवरलोड हो गया। देशभर में हजारों लोग एयरपोर्ट पर फंसे, कतारों में खड़े, फोन की बैटरी खत्म, और उम्मीद पूरी तरह डाउनग्रेड।
इसी बीच केंद्र सरकार ने आखिरकार “ओवरस्पीड एक्शन मोड” में उतरते हुए बड़ा आदेश जारी किया है।
48 घंटे का अल्टीमेटम: रिफंड दो… और मिसिंग बैग घर पहुंचाओ
केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय ने साफ कहा— 48 घंटों में सभी पैसेंजर्स का रिफंड प्रोसेस करो। 48 घंटे के भीतर मिसिंग लगेज यात्रियों के घर डिलीवर करो। रविवार रात 8 बजे तक काम पूरा—नहीं तो एक्शन तय।
सरल भाषा में। “जो गड़बड़ की है, अब उसे दुरुस्त करके दिखाओ!”
मनमाने किराये पर भी ‘बड़ी नकेल’
संकट शुरू होते ही कुछ एयरलाइंस ने मौका देखकर टिकटों के दाम ऐसे बढ़ाए जैसे वो फ्लाइट नहीं बल्कि मंगनी के बाद वाली बारात ले जा रही हों।
मंत्रालय ने इसे “अवसरवादी किराया” कहा और तुरंत किराया सीमा लागू कर दी। अब, एयरलाइंस तय दायरे में ही कीमत रखेंगी। सिस्टम की हर गतिविधि मॉनिटर होगी। नियम तोड़ा = फाइन + एक्शन। सरकार ने भी इशारों-इशारों में कह दिया- “टर्बुलेंस हम झेलेंगे, तमाशा नहीं।”
5 दिन से बेकाबू संकट: 2000+ फ्लाइटें रद्द
पिछले 5 दिनों में:

- 2000 से ज्यादा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द
- यात्री घंटों कतारों में फंसे
- कोई अपडेट नहीं—काउंटर पर लड़ाई-झगड़े तक
- कई लोग 2–3 रातों से एयरपोर्ट पर ही सो रहे
- स्टूडेंट्स, मरीज, बिज़नेस ट्रैवलर्स—सबकी प्लानिंग बर्बाद
एक यात्री ने कहा, “फ्लाइट तो कैंसिल हुई ही, ऊपर से मेरा बैग भी गायब। अब मैं ही बताओ—घर कैसे जाऊँ? मैं बैग ढूंढूं या जिंदगी?”
कारणों की ‘कॉम्बो लिस्ट’—जिसमें सब शामिल पर सॉल्यूशन कोई नहीं
- टेक्निकल ग्लिच
- खराब मौसम
- स्टाफ की कमी
- नियमों में गड़बड़ी
एयरलाइन की तरफ से अपडेट—लगभग ज़ीरो- यात्रियों का धैर्य—माइनस में।
सवाल बड़ा है: सिस्टम कब सुधरेगा?
हर बार वही कहानी— फ्लाइटें रद्द, लोग परेशान, मिसिंग बैग, हेल्पडेस्क गायब और आखिर में—सरकार की सख्त चेतावनी।
सवाल यही उठ रहा है, संकट टल भी गया तो क्या सिस्टम फिर से वही नहीं करेगा? क्या हर बार यात्रियों की जेब, समय और भावनाओं का क्रैश होगा?
इंडिगो क्राइसिस पर सरकार एक्शन में — 8 Emergency Rules लागू
