
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हंगरी को रूस से तेल और गैस ख़रीदने पर एक साल की छूट (waiver) दे दी है।
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि यह फ़ैसला “विशेष परिस्थितियों” में लिया गया है। मगर वॉशिंगटन में ये “विशेष परिस्थिति” Political Friendship के रूप में देखी जा रही है।
ओर्बान और ट्रंप की ‘तेल-तलब’ वाली केमिस्ट्री
हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान, जो ट्रंप के पुराने ‘Political Pal’ माने जाते हैं, रूस से ऊर्जा खरीदते रहे हैं — भले ही पूरी दुनिया “Sanction Mode” में है।
ट्रंप ने कहा, “हंगरी के लिए दूसरे देशों से तेल-गैस लाना मुश्किल है, इसलिए छूट जरूरी है।”
कूटनीतिक भाषा में इसे कहा गया Energy नेसेसिटी, लेकिन सियासी गलियारों में इसे कहा जा रहा है Friendship Policy!
अमेरिका ने रूस पर कसा था शिकंजा — पर हंगरी को ‘ग्रीन सिग्नल’!
कुछ ही हफ्ते पहले अमेरिका ने रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया था, और कहा था कि उनसे तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे। लेकिन हंगरी को मिला “ट्रंप स्टाइल एक्ससेप्शन”!
दुनिया कह रही है —“ट्रंप के राज में rules change नहीं होते, रिश्ते बदल देते हैं खेल!”

वैश्विक प्रतिक्रिया — यूरोप में फुसफुसाहट, मॉस्को में मुस्कुराहट
यूरोपीय नेताओं ने इस कदम पर “संतुलन की चिंता” जताई, जबकि रूस के मीडिया में इसे “अमेरिका की Realpolitik” कहा जा रहा है।
कह सकते हैं —“कूटनीति की शतरंज में अब ट्रंप ने अपने प्यादे को तेल से लुब्रिकेट कर दिया है!”
पहले तेल पर war, अब तेल पर waiver!
ओर्बान बोले — “दोस्ती में no tension, बस extension!”
अब दुनिया सोच रही है —क्या ये Energy Deal है या Friendship Fuel?
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