
रिपोर्ट: नेपाल से अजमल शाह के साथ
नेपाल के बांके जिले में हालात काबू से बाहर हो चुके हैं। जहां एक तरफ आम जनता महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता से पहले ही त्रस्त है, वहीं दूसरी ओर अब सीमा पर हिंसा ने आग में घी डालने का काम कर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने ना सिर्फ जिला प्रशासन कार्यालय, सिविल कोर्ट, और यातायात कार्यालय में आगजनी की, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की मूर्ति को भी तोड़ डाला।
रूपईडीहा बॉर्डर पर स्थित भंसार कार्यालय भी जला दिया गया
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रूपईडीहा बॉर्डर, जो कि उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से सटा हुआ है, वहां मौजूद भंसार नेपाली कार्यालय को भी भीड़ ने आग के हवाले कर दिया।
यह वही ऑफिस है जहाँ से भारतीय वाहनों को नेपाल में प्रवेश के लिए भंसार (कस्टम) पंजीकरण कराना पड़ता था। अब इस कार्यालय के जलने के बाद, सीमा पार व्यापार पूरी तरह ठप हो सकता है।
आगजनी का दायरा: अब सिर्फ सीमा नहीं, भीतर तक पहुंची हिंसा
आगजनी की घटनाएं सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं रहीं। प्रदर्शनकारियों ने बांके जिले के यातायात कार्यालय को भी जला दिया। कथित तौर पर पुलिस मूकदर्शक बनी रही, या फिर भीड़ की संख्या के आगे कमजोर पड़ गई। यह पहला मौका नहीं है जब नेपाल के तराई क्षेत्र में जनाक्रोश इस कदर भड़का हो। पिछले कुछ समय से नेपाल में लगातार सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो, स्थिति तनावपूर्ण
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौके से अनेक वीडियो सामने आए हैं, जिनमें स्पष्ट दिख रहा है कि आग की लपटें सरकारी बिल्डिंगों से उठ रही हैं, लोग नारों के साथ इमारतों में घुसते दिख रहे हैं। हालांकि अभी तक नेपाल सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर कोई ठोस आधिकारिक बयान नहीं आया है।

भारत के लिए चिंता: सीमा पर अस्थिरता, व्यापार और सुरक्षा पर असर
भारत के लिए यह स्थिति दोहरे संकट जैसी है – एक तरफ व्यापारिक मार्ग बाधित, दूसरी तरफ सीमा सुरक्षा पर भी सवाल। भंसार कार्यालय का जलना सिर्फ एक इमारत का खाक होना नहीं, बल्कि सीमा पार विश्वास और प्रक्रिया का जलना है।
“आगजनी सिर्फ इमारतों में नहीं, भरोसे में लगी है!”
“नेपाल में लोग सरकार से नाराज़ हैं, लेकिन निशाना बन गया सीमा का सिस्टम। ‘ओली’ की मूर्ति गिरी, पर क्या लोकतंत्र उठ खड़ा होगा?”
“भंसार कार्यालय जला, पर सवाल ये है –क्या सरकार अब भी ‘ठंडा पानी’ पी रही है?”
नेपाल की हिंसा के धुएं में धुंधला न हो जाए भारत-नेपाल संबंध
भारत-नेपाल के सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध सदियों पुराने हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं उस रिश्ते में दरार डाल सकती हैं।
अब जरूरत है नेपाल सरकार को तत्काल कदम उठाने की, भारत को कूटनीतिक सतर्कता बरतने की, और आम जनता को अफवाहों से दूर रहने की।
नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में बवाल के बाद भारत को सतर्क रहना चाहिए?
