डिंपल की साड़ी से मौलाना का माइंड ब्लास्ट, अब जुबान पर लगा इनाम फास्ट

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

समाजवादी पार्टी की बैठक भले संसद के नज़दीक एक मस्जिद में हुई हो, लेकिन चर्चा का केंद्र बन गई डिंपल यादव की साड़ी! मौलाना साजिद रशीदी ने टीवी डिबेट में टिप्पणी कर डाली — “पीठ नंगी थी, पल्लू भी नहीं था।” बस फिर क्या था, जैसे आग में घी गिरा हो।

योगी यूथ ब्रिगेड का ‘लाल’ गुस्सा

प्रदेश अध्यक्ष अजय तोमर ने मीडिया के सामने माइक थामते ही माइक को तलवार बना दिया। बोले:
“जो भी मौलाना की जुबान काटकर लाएगा, उसे देंगे 1.51 लाख रुपये!”
अब ये बयान भी सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, लेकिन कानूनी किताबें इस पर क्या कहती हैं, ये तो वकील ही जाने।

डिंपल पर चुप अखिलेश, लेकिन टोपी पहन राजनीति कर रहे लोग

अजय तोमर ने अखिलेश यादव पर भी तंज कसते हुए कहा, “मुस्लिम वोटों के पीछे अपनी पत्नी की इज्ज़त तक भूल गए!” अब अखिलेश यादव चुप हैं, लेकिन ट्विटर पर शेर बहादुर बन गए लोग पूछ रहे हैं — “घर की बात TV पर क्यों आई?”

धार्मिक टिप्पणी बनाम महिला सम्मान

सवाल यह नहीं है कि डिंपल ने क्या पहना, सवाल यह है कि किसी महिला के पहनावे पर मौलाना को टिप्पणी करने का कौन सा हक है? वहीं, मौलाना साहब का बयान तो जैसे वॉरंट के बिना अरेस्ट की तरह था — अजीब, असंवैधानिक और बेतुका।

कानून की क्लास: जुबान काटने की धमकी बनाम अभिव्यक्ति की आज़ादी

ध्यान रहे कि किसी की “जुबान काटने” का इनाम घोषित करना गंभीर अपराध है। लेकिन राजनीति में इन दिनों सिर्फ TRP और वोट बैंक की बात होती है। बयान एक, हेडलाइन दस!

“बयान का ज़हर और बयानवीरों की भरमार”

राजनीति अब नीति से ज़्यादा नाटकीयता की होड़ बन चुकी है। महिला सम्मान की बात तब तक अच्छी लगती है, जब तक वो सस्ती सुर्खियों में तब्दील न हो जाए। सियासत में असहमति हो सकती है, लेकिन असभ्यता नहीं।

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