नेपाल में लापता हुए 288 भारतीय, तमिलनाडु से सबसे ज्यादा; विदेश मंत्रालय ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

नई दिल्ली: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। इस त्रासदी में अब तक 270 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 1000 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। इसी बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि नेपाल में 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। मंत्रालय ने लापता भारतीयों से जुड़ी जानकारी साझा करने के साथ उनकी मदद के लिए विशेष 24 घंटे सक्रिय नियंत्रण कक्ष भी बनाया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से बात कर भारत की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिया है। नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों और उनके परिजनों की सहायता के लिए विदेश मंत्रालय ने विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है।

विदेश मंत्रालय ने जारी किए संपर्क नंबर

नेपाल में फंसे भारतीय नागरिक या उनके परिजन विदेश मंत्रालय के नियंत्रण कक्ष से संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए +91 11 2308 8718 और +91 11 2308 8719 पर फोन किया जा सकता है। व्हाट्सऐप कॉल या संदेश के लिए +919968291988 नंबर जारी किया गया है। इसके अलावा situationroom@mea.gov.in पर ईमेल भी किया जा सकता है।

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने भी आपातकालीन संपर्क नंबर जारी किए हैं। +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है।

किन राज्यों के हैं 288 लापता भारतीय

विदेश मंत्रालय की जानकारी के अनुसार नेपाल में लापता 288 भारतीय नागरिकों में 73 लोग त्रिशूली में काम करने वाले हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के दो अलग-अलग समूहों में 37 और 49 लोग शामिल थे, जिनके लापता होने की जानकारी है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के 32 और केरल के 33 नागरिक भी लापता हैं। 61 अन्य लोग अलग-अलग राज्यों से हैं।

तिब्बत की तरफ भी फंसे करीब 200 भारतीय

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। वहीं कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीय नागरिक चीन के तिब्बत क्षेत्र की ओर फंसे हुए हैं। करीब 200 भारतीयों ने वहां से निकलने के लिए भारत से मदद मांगी है।

मंत्रालय के मुताबिक इनमें 95 लोग गारचन में हैं और नेपाल में दाखिल होने के लिए बिल्सा की ओर बढ़ रहे हैं। चार लोग जीलोंग शहर में हैं, जबकि 13 लोग जुटुलपो में हैं और सागा शहर की ओर बढ़ रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि स्थिति लगातार बदल रही है।

नेपाल के लिए भारत ने भेजी 47.5 टन आपातकालीन सामग्री

भारत ने नेपाल में राहत और बचाव अभियान के लिए मानवीय सहायता भी भेजी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार दो विमानों के जरिए काठमांडू में राहत सामग्री पहुंचाई गई है। हवाई मार्ग से दो चरणों में कुल आठ टन दवाएं और एक टन खाने-पीने का सामान भेजा गया है। इसके अलावा भारत ने नेपाल के राहत और बचाव कार्यों में सहायता के लिए कुल 47.5 टन आपातकालीन सामग्री भेजी है।

ग्लेशियर फटने के बाद नदियों में आया सैलाब

बताया गया है कि तिब्बत में ग्लेशियर फटने के बाद पानी और मलबे का तेज बहाव नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में पहुंचा, जिसके बाद विनाशकारी बाढ़ आई। इस बाढ़ में 19 पुल, करीब 40 किलोमीटर राजमार्ग और नौ जलविद्युत परियोजनाएं तबाह हो गईं। बाढ़ का पानी करीब 30 फीट तक ऊपर पहुंचने की जानकारी है।

तेज बहाव में घरों और वाहनों समेत कई चीजें बह गईं। हालात की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रसुवा के लोगों के शव करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन में बरामद किए जा रहे हैं।

नेपाल के कई जिलों में तबाही, सैकड़ों शव बरामद

नेपाल पुलिस के मुताबिक अब तक बरामद शवों में चितवन से 108, नवलपरासी पूर्व से 62, धादिंग से 27, गोरखा से 20, रसुवा से 17, नवलपरासी पश्चिम से 15, नुवाकोट से 12 और तनहुन से नौ शव बरामद किए गए हैं। बाढ़ के बाद राहत और बचाव दल लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।

 

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