
हीरो बदल गए हैं और कहानी भी। आज फिल्मों में बंदूक उठाने वाला ‘स्टार’ है, और कानून मानने वाला ‘साइड कैरेक्टर’। यही देखकर यूपी के सीएम Yogi Adityanath ने वो कह दिया, जो शायद कई लोग सोचते थे लेकिन बोल नहीं पाते थे। “जब खलनायक ताली बटोरने लगे, तो समाज चुपचाप दिशा बदल रहा होता है।”
बयान: फिल्मों पर सीधा हमला
Yogi Adityanath ने साफ कहा कि ऐसी फिल्में, जो अपराधियों को हीरो बनाकर दिखाती हैं, उन्होंने कई पीढ़ियों को ‘बिगाड़’ दिया है।
उनका मानना है कि जब डाकू और अपराधी बड़े पर्दे पर ‘आइकन’ बन जाते हैं, तो युवा उन्हें रोल मॉडल मानने लगते हैं।
“स्क्रीन पर दिखने वाला हर किरदार, किसी न किसी के दिमाग में असली बन जाता है।”
बॉलीवुड पर सवाल: एंटरटेनमेंट या इन्फ्लुएंस?
यह पहली बार नहीं है जब फिल्मों के कंटेंट पर सवाल उठे हैं, लेकिन इस बार बात सीधे समाज पर असर की हो रही है। क्या बॉलीवुड सिर्फ मनोरंजन कर रहा है… या धीरे-धीरे सोच को shape भी दे रहा है? यही बहस अब तेज हो गई है। “मनोरंजन अगर सोच बदल दे, तो वह सिर्फ मनोरंजन नहीं रहता।”
युवाओं पर असर: असली चिंता
आज के दौर में युवा फिल्मों और वेब सीरीज से काफी प्रभावित होते हैं। डायलॉग, स्टाइल और यहां तक कि सोच भी स्क्रीन से कॉपी होती है। यही वजह है कि CM योगी ने फिल्म निर्माताओं से अपील की है कि वे ऐसा कंटेंट बनाएं जो प्रेरित करे, न कि भटकाए।

“जिस पीढ़ी का हीरो गलत हो, उसका भविष्य सही कैसे होगा?”
सच्चाई: सिनेमा और समाज का रिश्ता
सिनेमा हमेशा समाज का आईना कहा जाता है, लेकिन अब सवाल यह है कि आईना दिखा रहा है… या खुद तस्वीर बना रहा है? अगर फिल्मों में अपराध ग्लैमरस लगेगा, तो उसका असर जमीन पर भी दिखेगा—धीरे-धीरे, लेकिन गहराई से। फिल्में सिर्फ कहानी नहीं सुनातीं… वे सोच भी लिखती हैं।
बहस अभी बाकी है
योगी आदित्यनाथ का यह बयान एक नई बहस की शुरुआत है। एक तरफ क्रिएटिव फ्रीडम है, दूसरी तरफ सामाजिक जिम्मेदारी। अब फैसला दर्शकों और फिल्ममेकर्स के बीच है— कि वे तालियों के लिए कंटेंट बनाएंगे या बदलाव के लिए।
स्क्रीन पर जो बिकता है, वही समाज में टिकता है।
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