
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में NHPC के भूमिगत पावर हाउस की सुरंग में भूस्खलन हो गया। इस हादसे ने सुरंग का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया और अंदर काम कर रहे 19 कर्मचारी और अधिकारी फँस गए।
अब तक क्या हुआ?
ज़िला प्रशासन की जानकारी के मुताबिक़:
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अब तक 8 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।
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11 लोग अब भी अंदर फंसे हुए हैं, जिनसे संपर्क बना हुआ है।
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इन सभी को सुरक्षित निकालने का रेस्क्यू ऑपरेशन युद्धस्तर पर चल रहा है।
कौन-कौन जुटा है राहत कार्य में?
इस आपदा से निपटने के लिए कई एजेंसियाँ एक साथ काम कर रही हैं:
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ज़िला प्रशासन
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बीआरओ (BRO)
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एनएचपीसी (NHPC)
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एनडीआरएफ़ (NDRF)
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सीआईएसएफ़ (CISF)

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और अन्य आपातकालीन टीमें
कहां हो रही दिक्कत?
पिथौरागढ़ के डीएम विनोद गोस्वामी ने बताया कि:
“सुरंग के मुहाने और इमरजेंसी शाफ़्ट से लगातार मलबा हटाया जा रहा है। अंदर फंसे कर्मचारियों की स्थिति स्थिर है और सभी सुरक्षित हैं।”
वहीं उपज़िलाधिकारी धारचूला, जितेन्द्र वर्मा के मुताबिक़:
“पावर हाउस को कोई बड़ा नुक़सान नहीं हुआ है, लेकिन सुरंग का मुख्य द्वार लगातार मलबे से भर रहा है जिसे हटाने का काम जारी है।”
क्या कर्मचारियों के पास खाना-पानी है?
जी हाँ! अधिकारियों ने बताया कि सुरंग के अंदर किचन और फूड सप्लाई पहले से मौजूद है, जिससे फंसे हुए कर्मचारियों की बुनियादी ज़रूरतें फिलहाल पूरी हो रही हैं।
क्या है आगे की योजना?
बचाव टीमें मलबा हटाकर मुख्य रास्ता खोलने की कोशिश कर रही हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही सभी 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा।
राहत के इंतज़ार में 11 परिवार
हर बीतते मिनट के साथ फंसे हुए कर्मचारियों के परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है, लेकिन राहत एजेंसियों और प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह कंट्रोल में है और सभी सुरक्षित रेस्क्यू के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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